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South Asian University: सीपीआई (एम) सांसद ने विदेश मंत्री को लिखी चिट्ठी, छात्रों के निष्कासन पर जताई चिंता

Sun, 26 Feb 2023 12:29 PM IST
सौरभ पांडेय एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

South Asian University: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्यसभा सांसद डॉ वी शिवदासन ने केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर को एक पत्र लिखा है। उन्होंने विश्वविद्यालय से छात्रों के निष्कासन को लेकर चिंता जाहिर की है।
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CPI (Marxist) Rajya Sabha MP Dr V Sivadasan - फोटो : @ani
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CPI(M) MP Dr V Sivadasan on South Asian University: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्यसभा सांसद डॉ वी शिवदासन ने केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर को एक पत्र लिखकर दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय से छात्रों के निष्कासन और रस्टीकेशन पर चिंता व्यक्त की है।
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विदेश मंत्री को लिखे पत्र में डॉ वी शिवदासन ने कहा, “यह आपके ध्यान में लाने के लिए है, दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय के छात्रों के खिलाफ रस्टीकेशन और निष्कासन के आदेश जारी किए गए हैं। समझा जाता है कि छात्रवृत्ति न मिलने पर विरोध दर्ज कराने पर उन्हें दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। मुझे यह भी बताया गया है कि प्रशासन के उत्पीड़न ने एक छात्र को आत्महत्या करने की कोशिश करने की हद तक धकेल दिया था।”

डॉ शिवदासन ने कहा “यह अत्यंत निराशा का कारण है कि दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय जैसा एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा की गई सत्तावादी कार्रवाइयों से अपनी छवि धूमिल कर रहा है। छात्रों को विश्वास में लेने की आवश्यकता है और प्रशासन को इस मुद्दे को हल करने के लिए विचार-विमर्श का रास्ता अपनाना चाहिए।
 
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सीपीआई (एम) सांसद ने पत्र में आगे कहा कि दक्षिण एशियाई देशों के सामूहिक उद्यम के रूप में दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की काफी संभावनाएं हैं। “छात्रों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई संस्था की वृद्धि और विकास को नुकसान पहुंचाएगी। दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा 'अपमानजनक शब्दों' और 'अप्रमाणित दवाओं' का उपयोग करके छात्रों के चरित्र को खराब करने की कोशिश करने वाली समाचार रिपोर्टें मौजूद हैं। इस तरह का कदम बेहद निंदनीय है।
उन्होंने कहा, "मैं आपसे इस मामले में ध्यान देने और तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध करता हूं ताकि इस मुद्दे को लोकतांत्रिक और धार्मिक तरीके से हल किया जा सके, जो उच्च शिक्षा में लोकतंत्र और मुक्त भाषण के आदर्शों के उच्च सम्मान को दर्शाता है।" .
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