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कोविड-19 के कारण छात्रों का विदेश में पढ़ाई करने का सपना टूटा

Mon, 06 Apr 2020 07:48 AM IST
संजीव कुमार झा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
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ऑस्ट्रेलिया के डीकिन यूनिवर्सिटी से मंजूरी पत्र मिलने के बाद 21 वर्षीय तृप्ति लूथरा एक महीने पहले सातवें आसमान पर थी लेकिन अब कोरोना वायरस के बारे में दुनियाभर से आ रही खबरों का अपडेट जानने के लिए वह पूरे दिन न्यूज चैनलों से चिपकी रहती हैं क्योंकि इस महामारी से उनके विदेश में पढ़ाई के सपने पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। इस परेशानी का सामना तृप्ति जैसे हजारों छात्रों को करना पड़ रहा है।

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सितंबर से शुरू होने वाले सत्र के लिए न्यूयॉर्क में पढ़ने की तैयारी करने वाली अनुष्का रे के लिए मौजूदा हालात मनोबल तोड़ने वाले हैं। हालांकि इससे उनकी योजना डगमगाई नहीं है। वहीं कनाडा और इटली के कई कॉलेजों से स्वीकृति पत्र हासिल करने वाली तारा ओसान का मानना है कि यह वक्त प्लान बी तैयार करने और देश के ही कॉलेजों में आवेदन करने का है।

ऐसे कई छात्र हैं जिनकी विदेश में पढ़ाई करने का सपना विभिन्न देशों में लागू लॉकडाउन के कारण या तो टूट गया है या उसमें देरी हो रही है। कोविड-19 से पैदा हुई स्थिति के कारण दुनियाभर में कक्षाएं और वीजा प्रक्रिया निलंबित कर दी गई हैं।
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लूथरा ने कहा कि उनकी डीकिन यूनिवर्सिटी से वास्तुकला में मास्टर्स करने की योजना थी। उन्हें जल्द ही वहां जाना था और वह अपनी स्नातक की परीक्षाएं खत्म होने का इंतजार कर रही थीं। वह अपने लिए घर ढूंढने के साथ इंटर्नशिप तलाशने के लिए कक्षाएं शुरू होने से पहले वहां जाना चाहती थी। लेकिन अब लगता है कि वक्त ठहर गया है। उन्होंने देश के किसी कॉलेज में अभी आवेदन नहीं किया है और आर्थिक मंदी के कारण यहां नौकरी या इंटर्नशिप करने का विकल्प भी दूर की कौड़ी लग रहा है।

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श्रीराम स्कूल की छात्रा तारा इटली या कनाडा में विज्ञापन की पढ़ाई करना चाहती हैं। उनका मानना है कि आईबी पाठ्यक्रम चुनने वाले छात्र पहले ही विदेश में पढ़ने की योजना बना लेते हैं। उन्होंने कहा कि विदेश में पढ़ना इस साल संभव नहीं लग रहा है और अब वह प्लान बी तैयार करेंगी और यहां कॉलेजों में आवेदन करना शुरू करेंगी। न्यूयार्कमें लिबरल आर्ट्स की पढ़ाई करने की इच्छा रखने वाली अनुष्का ने अपनी योजना को अभी रद्द नहीं किया है।

‘स्टडी अब्रॉड’ परामर्शकों के अनुसार, हालात गंभीर हैं और इसका कई लोगों की दीर्घकालीन योजनाओं पर असर पड़ सकता है। दिल्ली में स्टडी अब्रॉड कंसल्टेंसी चलाने वाले अनुपम सिन्हा ने बताया कि कई छात्रों को पहले ही दाखिला मिल गया है लेकिन अब कक्षाएं ऑनलाइन होने और स्थिति के बारे में कोई स्पष्टता न होने से वे फिर से विचार कर रहे हैं। अभी तक जो छात्र विदेश में रहना चाहते थे उन्हें सिर्फ ऑनलाइन कक्षाएं लेने के लिए भारी भरकम फीस देना आकर्षक विकल्प नहीं लग रहा है।
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