पाकिस्तान
पाकिस्तान में सन 1956 में ही तीन तलाक को बैन कर दिया गया था। उस वक्त तीन तलाक को समाप्त करने के लिए एक कमेटी की सिफारिशों के आधार पर नियम बनाए गए।
क्या हैं नियम
- पति तलाक लेने के लिए सरकार संस्था चेयरमैन ऑफ यूनियन कौंसिल के पास नोटिस देगा।
- 30 दिन बाद यह कौंसिल दोनों के बीच सुलह कराने का प्रयास करेगी।
- कुल 90 दिन के वेटिंग पीरियड के बाद यदि समझौता नहीं हुआ तो तलाक माना जाएगा।
- पत्नी तलाक के बाद फिर से विवाह कर सकती है।
मिस्र
मिस्र पहला ऐसा देश है, जिसने वर्ष 1929 में अपने यहां तलाक पद्धति में बदलाव किया। न्यूज वेबसाइट स्कूपहूप के मुताबिक मिस्र ने यह बदलाव 13वीं सदी के इस्लामिक विद्वान इब्न तयमियाह द्वारा की गई कुरान की व्याख्या के आधार पर किया।
क्या है नियम
- यहां एक सत्र में तीन बार तलाक बोलने को एक तलाक ही माना जाता है।
- तीन तलाक तीन स्तरीय प्रक्रिया का पहला चरण है।
- यहां पहले तलाक के बाद 90 दिन का वेटिंग पीरियड है।
श्रीलंका
श्रीलंका एक मुस्लिम बहुल देश नहीं है लेकिन मुस्लिम विद्वानों का मानना है कि यहां कानून सबसे अच्छा है।
क्या है नियम
- यदि कोई मुसलमान अपनी पत्नी को तलाक देना चाहता है तो वह मुस्लिम जज कादी को नोटिस देगा।
- फिर जज, दोनों परिवारों के सदस्य, बड़े-बुजुर्ग तथा अन्य प्रभावशाली मुसलमान दोनों को समझाने का प्रयास करेंगे।
- नोटिस के 30 दिन के बाद पति अपनी पत्नी को तलाक दे सकता है।
- तलाक मुस्लिम जज और दो गवाहों की उपस्थिति में होगा।
इराक
इराक दुनिया का पहला अरब देश सन् 1959 में बना था। बता दें, इराक ने शरिया कोर्ट के कानूनों को सरकारी कोर्ट के कानूनों के साथ बदल दिया। इराक में एक बार में तीन तलाक बोलने पर एक ही तलाक माना जाता है।
क्या है नियम
- पति और पत्नी दोनों को ही तलाक लेने का हक है।
- अदालत पति और पत्नी के बीच झगड़े के वजह की जांच कर सकता है।
- अदालत दोनों के बीच सुलह के लिए दो लोगों की नियुक्ति कर सकता है।
- अदालत स्वयं भी मध्यस्थता कर सकती है। अदालत इसके बाद फैसला लेगी।
ट्यूनीशिया
सन् 1956 में ट्यूनीशिया में यह कानून बना था।
क्या है कानून
- ट्यूनीशिया के कानून के मुताबिक बिना जज से सलाह किए कोई भी पति एकतरफा अपनी पत्नी को तलाक नहीं दे सकता है।
- उसे तलाक का समुचित कारण भी बताना होगा।
- यहां पर शादी सीधे राज्य और न्यायपालिका के अंतर्गत आता है।
- सुलह-समझौते को लेकर अदालत के प्रयास को मानना होगा।
सीरिया
74% मुस्लामान सीरिया में बसा है। बता दें कि सन् 1953 में ही य कानून बन चुका है।
क्या है नियम
- यहां पर्सनल स्टेटस लॉ के आर्टिकल 92 के मुताबिक तलाक को कितनी भी बार बोला जाए लेकिन एक ही तलाक माना जाएगा।
- तलाक जज के सामने ही वैध माना जाता है।
बता दें कि इन देशों के अलावा इरान, ब्रुनेई, मोरक्को, कतर और यूएई, साइप्रस, जॉर्डन, अल्जीरिया पर भी तीन तलाक को लेकर अलग-अलग कानून बनाए गए हैं।