इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. जगदीश राय ने कॉन्फ्रेंस के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग भले ही अलग देशों से हो पर दोनों की विचारधारा समान थी। उन्होंने कहा कि दुनिया में सुख और शान्ति के लिए हमें हर प्रकार का भेदभाव खत्म करना होगा चाहे वह रंग के आधार पर हो या जाति, धर्म और लिंग के आधार पर, हमें एक ऐसे समाज कि आवश्यकता है जहां सभी को समान अधिकार प्राप्त हो। हम अपनी तरफ से पूरा प्रयास कर रहे हैं, विश्व में बहुलवाद तभी संभव है जब हम इस सोच को आगे बढ़ाएं।
डायरेक्टर एडमिनिस्ट्रेशन एवं रिटायर्ड आईजी बरेली जोन एलपी मिश्रा ने इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी का विस्तृत परिचय दिया। उन्होंने कहा कि हमारे छात्र देश-विदेशों में बेहतरीन प्लेसमेंट पा रहे हैं। इन्वर्टिस 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के भाव के साथ ग्लोबल फैमिली के कॉनसेप्ट पर विश्वास रखता है। कॉन्फ्रेंस के विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि प्लूरलिज्म आज खतरे में है, उन्होंने वेदों में शांति का महत्व बताते हुए कहा कि हमने दुनिया को इंसानी तौर-तरीको में बांध दिया है। जब हम हवा, पानी और पर्यावरण को ही शुद्ध नहीं रहने देंगे तो विकास का सही अर्थ कहां से आ पायेगा। दुनिया में शान्ति लाने के लिए हमें पूरे विश्व को एक समझना होगा।
गेस्ट ऑफ ऑनर इस्कॉन टेम्पल बरेली निर्देशक वेंकटेश्वर प्रभुजी ने कहा कि, हम बहुलवाद का उदाहरण बाहरी दुनिया में देखते हैं, पर इसका सबसे उचित उदहारण मानव शरीर के भीतर ही है। प्रत्येक व्यक्ति के अनेक अंग एक साथ सामंजस्य बैठा कर कार्य करते हैं और सभी का एक ही उद्देश्य होता है, उस मानव शरीर कि भलाई। एकत्व को बाहरी दुनिया में देखने से पहले हमें स्वयं के अंदर उसे लाना चाहिए। हमारे अन्दर कि यही समझ विश्व को बहुलवाद की ओर ले जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अपने मस्तिष्क पर नियंत्रण करके और उसे मित्र बनाकर ही सच्ची शांति पायी जा सकती है जिसके जरिये हम एकत्व कि सोच को आगे बढ़ा सकते हैं|
गेस्ट ऑफ ऑनर एनएल शर्मा ने दुनिया को फूलों की बगिया के समान बताते हुए कहा कि यह दुनिया रंग-बिरंगी है और इसी में इसका असली आनंद है, अगर एक रंग हो जाये तो बेरंग हो जाये। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार संगीत के लिए अलग स्वरों की और साहित्य के लिए अनेक अक्षरों कि आवश्यकता है उसी प्रकार समाज में एक से अधिक होना अनिवार्य है। उन्होंने शायरी के अंदाज़ में कहा कि ‘अगर कोई गैर नहीं तो कोई बैर नहीं’, धर्म विभाजित करने के लिए नहीं जोड़ने के लिए बने हैं।
गेस्ट ऑफ ऑनर प्रो. बेहनाज क्युगली मैरीमाउंट यूनिवर्सिटी एरिलिंगटन, यूएसए ने अपने पहली बार भारत आने कि खुशी जताई और दिल्ली के अक्षरधाम टेम्पल का जिक्र करते हुए उसे विश्व कि सबसे सुन्दर जगहों में से एक बताया, उन्होंने कहा कि वहां जाकर उन्हें मन कि शान्ति प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि प्लूरलिज्म के जरिये विश्व कि कई बड़ी समस्याएं जैसे जातिवाद और आतंकवाद को जड़ से खत्म किया जा सकता है यदि सभी देश एक साथ मिलकर प्रयास करें। उन्होंने 'एन्त्रेप्रेनुएरशिप इन मीडिल ईस्टर्न कन्ट्रीज, एम्फेसिस इन ईरान' विषय पर प्रेजेंटेशन भी दी।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता ऐके शर्मा आईआईटी कानपुर ने आरक्षण पर चर्चा करते हुए कहा कि इसका सही उद्देश्य तभी पूरा हो पायेगा जब आरक्षित वर्ग के छात्रों को सिर्फ दाखिला देने तक ही नहीं आगे भी मदद मिले, साथ ही अनारक्षित वर्ग के छात्रों को असमानता महसूस ना हो। साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में मानव मूल्यों को भी महत्व दिया जाए। उन्होंने 'मैनेजिंग पीपल इन ऑर्गेनाइजेशनल कॉन्टेक्स्ट इन इंडिया' पर प्रजेंटेशन दिया।
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