आपत्ति शुल्क पर कही ये बात
पीठ ने उत्तर कुंजी को चुनौती देने के लिए प्रति प्रश्न 1,000 रुपये शुल्क वसूलने पर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि छात्रों और संस्थानों दोनों के हितों में "संतुलन" होना चाहिए। अन्य संस्थानों से तुलना करने पर यह शुल्क "अत्यधिक और असंतुलित" प्रतीत हुआ। हालांकि, कोर्ट ने यह भी माना कि संघ का यह तर्क कल्पनातीत नहीं है कि यह शुल्क बेवजह आपत्तियां करने वाले या कोचिंग संस्थानों को रोकने के लिए रखा गया है।
फिर भी, कोर्ट ने उम्मीद जताई कि संघ इस विषय पर गौर करेगा और भविष्य में इतनी अधिक फीस से बचने के लिए उपयुक्त कदम उठाएगा।
कोर्ट ने सुझाव दिया कि यह मामला जस्टिस जी. रघुराम (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष रखा जाए और उनकी राय के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाए।
अदालत ने उत्तर कुंजी में दिए गए उत्तरों की सही या गलत होने की स्थिति का मूल्यांकन याचिकाकर्ताओं और संघ के वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद किया।
बता दें कि क्लैट परीक्षा देश के राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों (NLUs) में स्नातक और परास्नातक कानून पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है। 2025 के लिए परीक्षा 1 दिसंबर 2024 को आयोजित हुई थी। परीक्षा को लेकर कई उच्च न्यायालयों में याचिकाएं दाखिल हुई थीं, जिनमें कई प्रश्नों को गलत बताया गया था।
6 फरवरी को, सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी याचिकाओं को दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिया ताकि इस मुद्दे पर एक समान और स्पष्ट निर्णय हो सके। यह आदेश संघ द्वारा दायर स्थानांतरण याचिकाओं पर दिया गया था।