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School Punishment: देर से आने पर 100 उठक-बैठक कराए, कुछ दिन बाद छात्रा की मौत; प्रशासन ने शुरू की जांच

Sun, 16 Nov 2025 10:33 AM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

School Incident: महाराष्ट्र के वसई क्षेत्र में एक दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां स्कूल में देर से आने पर कक्षा छठी की छात्रा को 100 उठक-बैठक की सजा दी गई। सजा के बाद छात्रा की तबीयत बिगड़ती गई और कुछ दिन बाद उसकी मौत हो गई। घटना सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन और प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
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छात्रा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
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Maharashtra Student Death: महाराष्ट्र के पालघर जिले के एक निजी स्कूल की छठी कक्षा की छात्रा की लगभग एक सप्ताह पहले मौत हो गई, जब उसे देर से आने की सजा के तौर पर कथित तौर पर 100 उठक-बैठक करने को कहा गया था।

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वसई क्षेत्र के सातीवली स्थित स्कूल की छात्रा अंशिका गौड़ का शुक्रवार रात मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के सदस्यों के अनुसार, अंशिका और चार अन्य छात्राओं को 8 नवंबर को स्कूल देर से पहुंचने पर 100-100 उठक-बैठक करने के लिए मजबूर किया गया।

परिजनों ने अमानवीय सजा का लगाया आरोप  

मृतक लड़की की मां ने आरोप लगाया कि उसकी बेटी की मौत उसकी शिक्षिका द्वारा दी गई "अमानवीय सजा" के परिणामस्वरूप हुई, जिसने उसे स्कूल बैग पीठ पर रखकर उठक-बैठक करने को कहा था।

वसई के मनसे नेता सचिन मोरे ने दावा किया कि अंशिका को पहले से ही स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद सजा दी गई। स्कूल के एक शिक्षक ने कहा, "यह पता नहीं चल पाया है कि इस बच्ची ने कितने उठक-बैठक लगाए थे। वास्तव में यह पता नहीं चल पाया है कि उसकी मौत इसी वजह से हुई या किसी और वजह से।" खंड शिक्षा अधिकारी पांडुरंग गलांगे ने कहा कि अंशिका की मौत की जाँच की जा रही है।

उन्होंने कहा, "जांच से उसकी मौत का सही कारण पता चल जाएगा।" अधिकारियों ने बताया कि अभी तक कोई पुलिस शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।
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बैग के साथ उठक-बैठक कराने से बढ़ी तबीयत

मीडियाकर्मियों से बात करते हुए, मृतक लड़की की मां ने कहा कि शारीरिक दंड दिए जाने के बाद उनकी बेटी की स्वास्थ्य स्थिति तेजी से बिगड़ गई।

उन्होंने कहा, "सजा के बाद, उसकी गर्दन और पीठ में भयंकर दर्द हुआ और वह उठ नहीं सकी।"

महिला ने बताया कि जब उसे घटना और अपनी बेटी की हालत के बारे में पता चला तो वह स्कूल गई और शिक्षक से शिकायत की।

उन्होंने कहा, "मुझे बताया गया कि छात्रों को स्कूल देर से आने के लिए दंडित किया गया था। शिक्षक ने दंड को उचित ठहराते हुए कहा कि अभिभावक उन पर आरोप लगाते हैं कि वे फीस देने के बावजूद छात्रों को नहीं पढ़ा रहे हैं।"

उन्होंने कहा, "मैंने शिक्षक से कहा कि छात्रों को सज़ा देने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें पीठ पर बैग रखकर उठक-बैठक करने के लिए मजबूर किया जाए। शिक्षक ने मेरी बेटी को अमानवीय सजा दी, जिससे उसकी मौत हो गई।"
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