परिजनों ने अमानवीय सजा का लगाया आरोप
मृतक लड़की की मां ने आरोप लगाया कि उसकी बेटी की मौत उसकी शिक्षिका द्वारा दी गई "अमानवीय सजा" के परिणामस्वरूप हुई, जिसने उसे स्कूल बैग पीठ पर रखकर उठक-बैठक करने को कहा था।
वसई के मनसे नेता सचिन मोरे ने दावा किया कि अंशिका को पहले से ही स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद सजा दी गई। स्कूल के एक शिक्षक ने कहा, "यह पता नहीं चल पाया है कि इस बच्ची ने कितने उठक-बैठक लगाए थे। वास्तव में यह पता नहीं चल पाया है कि उसकी मौत इसी वजह से हुई या किसी और वजह से।" खंड शिक्षा अधिकारी पांडुरंग गलांगे ने कहा कि अंशिका की मौत की जाँच की जा रही है।
उन्होंने कहा, "जांच से उसकी मौत का सही कारण पता चल जाएगा।" अधिकारियों ने बताया कि अभी तक कोई पुलिस शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।
बैग के साथ उठक-बैठक कराने से बढ़ी तबीयत
मीडियाकर्मियों से बात करते हुए, मृतक लड़की की मां ने कहा कि शारीरिक दंड दिए जाने के बाद उनकी बेटी की स्वास्थ्य स्थिति तेजी से बिगड़ गई।
उन्होंने कहा, "सजा के बाद, उसकी गर्दन और पीठ में भयंकर दर्द हुआ और वह उठ नहीं सकी।"
महिला ने बताया कि जब उसे घटना और अपनी बेटी की हालत के बारे में पता चला तो वह स्कूल गई और शिक्षक से शिकायत की।
उन्होंने कहा, "मुझे बताया गया कि छात्रों को स्कूल देर से आने के लिए दंडित किया गया था। शिक्षक ने दंड को उचित ठहराते हुए कहा कि अभिभावक उन पर आरोप लगाते हैं कि वे फीस देने के बावजूद छात्रों को नहीं पढ़ा रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "मैंने शिक्षक से कहा कि छात्रों को सज़ा देने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें पीठ पर बैग रखकर उठक-बैठक करने के लिए मजबूर किया जाए। शिक्षक ने मेरी बेटी को अमानवीय सजा दी, जिससे उसकी मौत हो गई।"