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Education System: क्यों चर्चा में आया चीन का दो दशक पुराना शिक्षा मॉडल? जीतू पटवारी के बयान के बाद चर्चा तेज

Thu, 23 Jul 2026 08:55 PM IST
Akash Kumar एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

China Education System: भारत में परीक्षा विवाद और NEET-UG पेपर लीक के बीच कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने चीन के शिक्षा मॉडल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चीन ने करीब 20 साल पहले बड़े शिक्षा सुधार किए थे। ऐसे में आइए जानते हैं कि शिक्षा में सुधार के लिए चीन ने कौन-कौन से कदम उठाए और उनसे क्या बदलाव आया।
 
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China Education System - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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China Education System: देश में इन दिनों प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और NEET-UG पेपर लीक जैसे मामलों को लेकर छात्रों में नाराजगी देखने को मिल रही है। जंतर-मंतर समेत देश में कई जगह युवा विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी बीच मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की एक बयान के बाद चीन का शिक्षा रिफॉर्म मॉडल चर्चा में है।

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ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या है चीन का वो शिक्षा मॉडल जिसका जिक्र जीतू पटवारी ने किया और इसे लागू करने के बाद ड्रैगन की शिक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव आए...
 

क्या बोले जीतू पटवारी?

जीतू पटवारी ने चीन की शिक्षा व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह की चुनौतियों का सामना आज भारत कर रहा है, वैसी ही स्थिति करीब दो दशक पहले चीन में भी थी। उनके मुताबिक, चीन ने समय रहते शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव किए और आज उसके परिणाम पूरी दुनिया के सामने हैं।

इंदौर में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में बोलते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि चीन ने करीब 20 साल पहले अपनी शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार किए थे। उनका कहना था कि उन्हीं सुधारों की वजह से आज चीन वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति में है।
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चीन ने शिक्षा व्यवस्था में कब और क्यों किए बड़े बदलाव?

चीन ने 1990 के दशक के आखिर और 2000 के दशक की शुरुआत में अपनी शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार शुरू किए। उस समय वहां भी शिक्षा की गुणवत्ता, परीक्षा व्यवस्था और रोजगार जैसी कई चुनौतियां थीं। इन समस्याओं से निपटने के लिए सरकार ने कई बड़े फैसले लिए, जिनका असर आने वाले वर्षों में दिखाई दिया।

1. विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय बनाने पर बड़ा निवेश

चीन ने प्रोजेक्ट 211 और प्रोजेक्ट 985 जैसी योजनाएं शुरू कीं। इनका उद्देश्य चुनिंदा विश्वविद्यालयों को विश्वस्तरीय संस्थान बनाना था। सरकार ने रिसर्च, विज्ञान और उच्च शिक्षा के विकास पर बड़े पैमाने पर निवेश किया ताकि चीनी विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

2. कॉलेजों में दाखिले की सीटें बढ़ाईं

चीन के शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट "China's Education: 40 Years of Epic Achievements" के अनुसार, 1999 में कॉलेजों की सीटों में 47.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई।

उसी वर्ष कॉलेजों में दाखिले की संख्या 10.8 लाख से बढ़कर 15,96,800 हो गई। इसके बाद उच्च शिक्षा का दायरा लगातार बढ़ता गया। जहां 1997 में करीब 10 लाख छात्र कॉलेज पहुंचते थे, वहीं 2020 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 96 लाख प्रति वर्ष हो गई। इस कदम का उद्देश्य अधिक से अधिक युवाओं को उच्च शिक्षा से जोड़ना और उन्हें रोजगार के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना था।

3. गाओकाओ परीक्षा में सख्त नियम लागू किए

चीन की राष्ट्रीय विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा गाओकाओ (Gaokao) को दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में माना जाता है। इस परीक्षा में नकल और पेपर लीक रोकने के लिए चीन ने बेहद कड़े नियम बनाए। परीक्षा में धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और कई मामलों में जेल तक की सजा का प्रावधान किया गया।

4. स्किल आधारित शिक्षा पर दिया जोर

चीन ने केवल डिग्री देने पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि स्किल आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया। स्कूलों और कॉलेजों को उद्योगों तथा तकनीकी कंपनियों से जोड़ा गया ताकि पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
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