सीबीएसई बोर्ड परीक्षा
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने हाल ही में कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं को साल में दो बार आयोजित करने की योजना को मंजूरी दे दी है। यह नई व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2025-26 से लागू होगी, जिसमें पहली परीक्षा जनवरी 2026 और दूसरी परीक्षा अप्रैल 2026 में आयोजित की जाएगी। छात्रों को दोनों परीक्षाओं में शामिल होने का विकल्प मिलेगा, और बेहतर प्रदर्शन वाले परिणाम को अंतिम स्कोर में शामिल किया जाएगा
छत्तीसगढ़ बोर्ड परीक्षा
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CGBSE) ने घोषणा की है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 से कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित की जाएंगी। विभाग की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि अंतिम बोर्ड परीक्षाओं का पहला चरण मार्च में और दूसरा जुलाई में होगा।
इस पहल का उद्देश्य छात्रों के शैक्षणिक तनाव को कम करना और उन्हें अपनी योग्यता सुधारने के अधिक अवसर प्रदान करना है।
मेघालय बोर्ड परीक्षा
मेघालय के शिक्षा मंत्री रक्कम ए संगमा ने अगस्त, 2024 को कहा कि राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड अगले साल से कक्षा 10वीं की दो परीक्षाएं आयोजित करेगा। संगमा ने को बताया कि मेघालय बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (एमबीओएसई) 2025 में दो सेकेंडरी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट परीक्षा (एसएसएलसी) परीक्षाएं आयोजित करेगा।
संगमा ने कहा, "2025 की शुरुआत से, एमबीओएसई प्रत्येक वर्ष दो एसएसएलसी बोर्ड परीक्षा आयोजित करेगा। पहली परीक्षा फरवरी या मार्च की शुरुआत में होगी, और दूसरी परीक्षा में सभी या कुछ विषयों में फेल होने वाले छात्रों को एक से दो महीने के भीतर फिर से परीक्षा देने की अनुमति होगी, जो मई में होगी।"
कर्नाटक बोर्ड परीक्षा
कर्नाटक सरकार ने 2023 को एक आधिकारिक सरकारी आदेश जारी किया, जिसमें कर्नाटक राज्य परीक्षा और मूल्यांकन बोर्ड (KSEAB) को कक्षा 10वीं (SSLC) और कक्षा 12वीं (द्वितीय PUC) के छात्रों के लिए परीक्षा कुल तीन वार्षिक परीक्षाएं आयोजित करने की अनुमति दी गई।
कर्नाटक राज्य में कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं अब साल में तीन बार आयोजित की जाती हैं। यह प्रणाली शैक्षणिक सत्र 2023-24 से लागू की गई है, जिसका उद्देश्य छात्रों को अपने प्रदर्शन में सुधार के लिए अधिक अवसर प्रदान करना है। तीनों परीक्षाओं में से, जिसमें छात्र सर्वोत्तम अंक प्राप्त करेगा, वही अंतिम परिणाम में शामिल किया जाएगा। इस पहल के तहत, पूरक परीक्षाओं (सप्लीमेंट्री एग्जाम) की अवधारणा को समाप्त कर दिया गया है।