- चंद्रयान 2 के लैंडर का नाम डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है, जिन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम (Indian Space Programme) का जनक भी कहा जाता है।
- 'विक्रम' लैंडर का वजन 1,471 किलो ग्राम है। यह 650 वॉट बिजली जनरेट कर सकता है।
- इसे चंद्रमा की सीमा में एक दिन (One Lunar Day) तक काम करने के अनुसार तैयार किया गया है। चंद्रमा का एक दिन पृथ्वी के 14 दिन के बराबर होता है।
- विक्रम लैंडर में बेंगलुरू के पास स्थित इसरो के IDSN सेंटर से संपर्क करने की भी क्षमता है। इसके अलावा यह प्रज्ञान रोवर और ऑर्बिटर से भी संपर्क कर सकता है।
इसरो ने विक्रम लैंडर से संबंधित एक वीडियो भी जारी किया है। यह वीडियो आप इस खबर में आगे देख सकते हैं।
ये तो बात हुई
विक्रम लैंडर की। अब बात करते हैं चंद्रयान 2 के रोवर
प्रज्ञान की। रोवर को ये नाम किसी शख्स के नाम पर नहीं दिया गया है। फिर क्यों इसरो ने रोवर का ये नाम रखा?
दरअसल इसरो और इसके वैज्ञानिक भारत की परंपरा को भी मानते हैं। हमारी भाषा संस्कृत से उन्होंने ये नाम लिया है। इसरो ने बताया है कि प्रज्ञान का अर्थ होता है 'बुद्धिमता' (wisdom)। प्रज्ञान रोवर को चंद्रमा की सतह पर अपनी बुद्धिमता का परिचय देना है। वहां कई चीजों का पता लगाना है।
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प्रज्ञान रोवर में 6 रोबोटिक पहिये हैं। यह करीब 500 मीटर तक सफर कर सकता है। काम करने के लिए प्रज्ञान सोलर ऊर्जा का इस्तेमाल करेगा। यह सिर्फ लैंडर विक्रम से संपर्क स्थापित कर सकता है।
ISRO द्वारा जारी विक्रम लैंडर का वीडियो, यहां देखें