इन 05 राज्यों ने अभी तक केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जबकि 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) ने ऐसा किया है। इस बात की जानकारी गुरुवार को सूत्रों से मिली है।
इस योजना का लक्ष्य 14,500 स्कूलों को अपग्रेड करना है। इससे 1.8 मिलियन छात्रों को लाभ होने की उम्मीद है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना भी है कि ये स्कूल मॉडल संस्थानों के रूप में काम करें और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की भावना को समाहित करें। सरकार ने पहले दौर में 28 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 6,448 स्कूलों का चयन कर लिया है।
एक सूत्र ने कहा, "समग्र शिक्षा योजना के लिए केंद्र से धन लेने के बावजूद, पांच राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों (ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और दिल्ली) का पीएम श्री स्कूलों के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर करने से इनकार करना एक परेशान करने वाले पैटर्न को दर्शाता है। पंजाब ने शुरुआत में एमओयू पर हस्ताक्षर करने के बाद, पीएम श्री के कार्यान्वयन को रोक दिया।"
सूत्र ने कहा, "यह राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा एक स्पष्ट राजनीतिकरण है, जहां वे समग्र शिक्षा के तहत धन स्वीकार करते हैं लेकिन पीएम श्री के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने का विरोध करते हैं।"
जब सूत्र से पूछा गया कि क्या केंद्र इन राज्यों के लिए समग्र शिक्षा योजना के तहत फंडिंग रोक सकता है, तो उसने कहा, "किसी भी बात से इंकार नहीं किया जा सकता है।"