सुप्रीम कोर्ट ने मामले याचिका पर नहीं किया विचार
अदालत में यह मामला एनसीईआरटी की पुरानी कक्षा 8 की किताब के एक अंश को लेकर उठा था, जिसमें झुग्गी निवासियों को लेकर कुछ न्यायिक टिप्पणियों का जिक्र किया गया था।
इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका को स्वस्थ आलोचना के प्रति अत्यधिक संवेदनशील नहीं होना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी फैसले पर अलग दृष्टिकोण रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और लोगों को न्यायिक निर्णयों की आलोचना करने का अधिकार है।
मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका की संरचना, कार्यप्रणाली और उपलब्धियों का भी उल्लेख है, साथ ही कुछ ऐसे निर्णयों का जिक्र है जिन्हें आम लोगों के हित के विपरीत माना जाता है। इसे एक दृष्टिकोण के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि आपत्तिजनक सामग्री के रूप में।
इस फैसले के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि पाठ्यपुस्तकों में आलोचनात्मक विचारों को पूरी तरह से हटाने की जरूरत नहीं है, बल्कि संतुलित और तथ्यात्मक प्रस्तुति पर जोर दिया जाएगा।