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नई शिक्षा नीति पर केंद्र और 25 राज्यों की बैठक, केंद्र सरकार से मांगी मदद

Fri, 09 Aug 2019 09:01 AM IST
Garima Garg एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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पश्मिच बंगाल समेत जो राज्य स्कूली पाठ्यक्रम में भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्य, सिद्धांतों को शामिल करने का विरोध कर रहे थे, वे सब अब मोदी सरकार के साथ समर्थन में हैं। मोदी सरकार को नई शिक्षा नीति के ड्रॉफ्ट को लागू करने के लिए 25 राज्यों का साथ मिल गया है। राज्यों ने बैठक में स्कूली पाठ्यक्रम में मानवीय मूल्य, भारतीय संस्कृति, सिद्धांतों को खुद शामिल करने की मांग रखी है। केंद्र सरकार द्वारा राज्यों के सुझावों के तहत नई शिक्षा नीति में खास बात यह है कि राज्यों का मानना है कि दुनिया में भारतीय शिक्षा का परचम लहराने के लिए विदेशी फैकल्टी और छात्रों को जोड़ने की सरकार की पहल सराहनीय है। 

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विज्ञान भवन में बृहस्पतिवार को मानव संसाधन विकास मंत्रालय और 25 राज्यों व यूटी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई।  राज्यों ने नई शिक्षा नीति के ड्रॉफ्ट पर अपनी मंजूरी दे दी है। बैठक की अध्यक्षता मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने की। जबकि 25 राज्यों व यूटी की ओर से मुख्य सचिव, सचिव और प्रधान सचिव शामिल रहे। नई शिक्षा नीति ड्रॉफ्ट कमेटी व मंत्रालय की वरिष्ठ अधिकारी शकीला शम्सू ने नई शिक्षा नीति के ड्रॉफ्ट पर विस्तार से प्रजेंटेंशन दी।

दिल्ली ने इंटरनेशनल फैकल्टी को भारत से जोडने का दिया सुझाव

दिल्ली सरकार की ओर से बैठक में इंटरनेशनल फैकल्टी को भारत से जोडने का सुझाव दिया गया। सरकार के प्रतिनिधि ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए हमें इंटरनेशनल फैकल्टी को भारतीय स्कूलों से जोडने पर काम करना होगा। बैठक में वोकेशनल शिक्षा को बढ़ाने और शिक्षकों की तर्ज पर नॉन टीचिंग स्टॉफ को बेहतर ट्रेनिंग, विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को स्वायत्त्ता देने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग रखी गई है।इसके अलावा  ड्रॉफ्ट में रिसर्च और नई योजनाओं को बढ़ाने के लिए राज्यों ने पैसे की कमी का हवाला देते हुए केंद्र से अतिरिक्त फंड की मांग रखी है।
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नॉर्थ-ईस्ट समेत हिमाचल व उत्तराखंड ने मांगा विशेष पैकेज

नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों के सचिवों ने नई शिक्षा नीति के तहत नई योजनाओं व रिसर्च को शुरू करने के लिए केंद्र सरकार से विशेष पैकेज मांगा है। उनका कहना है कि शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने समेत इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए उन्हें ओर पैसे की जरूरत है। इसके अलावा पहाड़ी राज्यों(हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) ने भी शिक्षा के लिए ओर अधिक बजट देने की मांग रखी है। 

राज्यों का मिला साथ, शिक्षकों के पदों को जल्द भरने की मांग

नई शिक्षा नीति के ड्रॉफ्ट पर आयोजित बैठक में 25 राज्यों का साथ मिल गया है। 33 सालों के बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए सभी राज्यों के सुझावों को आमंत्रित करते हुए उन्हें शामिल किया जाएगा। नीति केंद्र नहीं, यह नीति केंद्र नहीं सभी राज्यों की है। अभी तक डेढ़ लाख सुझाव मिल चुके हैं। जबकि राज्यों से फिर कहा गया है कि यदि कुछ ओर सुझाव देना चाहते हैं तो पंद्रह से 20 दिन में भेज दें। राज्यों को शिक्षकों के खाली पदों को जल्द से जल्द भरने की फिर से मांग रखी है, ताकि छात्रों को पढ़ाई का नुकसान न हो।

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