12वीं के छात्रों ने संभाली कार्यक्रम की मेजबानी
टॉकाथॉन की मेजबानी कक्षा 12 के दो छात्रों ने की। इनमें दिल्ली के पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, सेक्टर-4, आरके पुरम की सामिया और पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय नंबर-3, दिल्ली कैंट के रोहित सिंह शामिल रहे।
कार्यक्रम के तकनीकी, प्रोडक्शन और लॉजिस्टिक सहयोग की जिम्मेदारी डीडी न्यूज ने संभाली। कार्यक्रम का सीधा प्रसारण CBSE के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर भी किया गया।
विशेषज्ञों के पैनल में कौन-कौन रहा?
टॉकाथॉन में नशे की रोकथाम और इससे जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा के लिए विशेषज्ञों का पैनल शामिल किया गया था। इसमें ये सदस्य रहे-
- प्रोफेसर नंद कुमार, मनोचिकित्सा विभाग, एम्स नई दिल्ली
- अलका अवस्थी, प्रिंसिपल, मेयूर स्कूल, नोएडा
- अनीस सी, अतिरिक्त निदेशक, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, नई दिल्ली
विशेषज्ञों ने छात्रों के सवालों का जवाब दिया और नशे की समस्या से जुड़े सामाजिक, मानसिक और शैक्षिक पहलुओं पर बातचीत की।
मानसिक स्वास्थ्य और साथियों के दबाव पर छात्रों ने पूछे सवाल
कार्यक्रम में छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य, साथियों के दबाव यानी पीयर प्रेशर और नशे की लत से बाहर निकलने के उपायों से जुड़े सवाल पूछे। सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त सवालों का पैनल के सदस्यों ने कार्यक्रम के दौरान जवाब दिया। इस दौरान छात्रों को नशे से दूर रहने, स्वस्थ विकल्प चुनने और जिम्मेदार व्यवहार अपनाने के महत्व पर चर्चा का अवसर मिला।
2047 के विकसित भारत से जोड़ा अभियान
सीबीएसई ने कहा कि इस पहल का आधार यह विचार है कि बच्चों और युवाओं को स्वस्थ और जिम्मेदार विकल्पों की मजबूत नींव देना जरूरी है। आज के बच्चे और युवा ही भविष्य के नागरिक और देश के विकास में योगदान देने वाली पीढ़ी होंगे।
बोर्ड ने इस पहल को 2047 तक विकसित भारत के विजन से भी जोड़ा। सीबीएसई के अनुसार, युवाओं को नशे से दूर रखने और स्वस्थ विकल्पों के प्रति जागरूक करने से उन्हें भविष्य में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार किया जा सकता है।
सोशल मीडिया पर भी मिला अच्छा रिस्पॉन्स
सीबीएसई के अनुसार, टॉकाथॉन को सोशल मीडिया पर उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली। बोर्ड ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान #CBSETalkathon भारत में नंबर एक पर ट्रेंड कर रहा था।
इस पहल के जरिए सीबीएसई ने छात्रों को केवल एकतरफा जागरूकता संदेश देने के बजाय उन्हें सीधे संवाद का हिस्सा बनाया, जहां वे मानसिक स्वास्थ्य, पीयर प्रेशर और डी-एडिक्शन जैसे विषयों पर अपने सवाल विशेषज्ञों के सामने रख सके।