किन जगहों पर डिजिटल भुगतान की सुविधा देनी होगी?
- स्कूल फीस
- कैंटीन
- पुस्तकालय
- स्कूल की अन्य भुगतान आधारित सेवाएं
बोर्ड ने इन सभी भुगतान बिंदुओं पर एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) और रुपे कार्ड जैसे डिजिटल माध्यमों को बढ़ावा देने को कहा है।
कम नेटवर्क वाले इलाकों में स्कूल क्या करेंगे?
सीबीएसई ने कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में स्थित स्कूलों के लिए भी विकल्प बताए हैं। ऐसे स्कूल यूपीआई लाइट, यूपीआई लाइटएक्स और यूपीआई123पे जैसे माध्यम अपना सकते हैं। इसका उद्देश्य कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में भी डिजिटल भुगतान को आसान बनाना है।
बोर्ड ने स्कूलों को केवल डिजिटल भुगतान की सुविधा शुरू करने के बजाय विद्यार्थियों, शिक्षकों और अन्य संबंधित लोगों को इसका इस्तेमाल समझाने के लिए प्रदर्शन और मार्गदर्शन देने को भी कहा है।
स्कूलों में डिजिटल भुगतान की जानकारी कैसे बढ़ाई जाएगी?
सीबीएसई ने स्कूल प्रमुखों और प्रबंधकों को एक व्यापक डिजिटल भुगतान प्रोत्साहन योजना तैयार करने के लिए कहा है। इस योजना का उद्देश्य डिजिटल भुगतान की पहुंच बढ़ाना, उसका इस्तेमाल बढ़ाना और सुरक्षित डिजिटल लेनदेन के बारे में जागरूकता पैदा करना है।
शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए क्या करना होगा?
बोर्ड के अनुसार, स्कूलों को शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में डिजिटल भुगतान से जुड़ी जागरूकता को शामिल करना चाहिए। इसके साथ ही स्कूल स्तर पर अभियान चलाकर वित्तीय साक्षरता से जुड़े विषयों की जानकारी दी जा सकती है। इनमें डिजिटल भुगतान भी शामिल होगा।
अभिभावकों को भी डिजिटल भुगतान के बारे में बताएंगे स्कूल?
हां। सीबीएसई ने स्कूलों से अभिभावकों के लिए भी जागरूकता अभियान चलाने को कहा है। इन अभियानों के जरिए अभिभावकों को डिजिटल भुगतान के सुरक्षित और सुविधाजनक इस्तेमाल के बारे में जानकारी दी जा सकती है।
ये अभियान कब और कहां हो सकते हैं?
- स्कूल परिसर में
- स्कूल के कार्यक्रमों के दौरान
- अभिभावक-शिक्षक बैठकों के दौरान
इसका उद्देश्य अभिभावकों को डिजिटल भुगतान के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए जागरूक करना है।
फीस जमा करने के लिए भारत बिल भुगतान प्रणाली का इस्तेमाल कैसे होगा?
सीबीएसई के अनुसार, स्कूल भारत बिल भुगतान प्रणाली (बीबीपीएस) से भी जुड़ सकते हैं। इससे फीस जैसे भुगतान को एक समान, सुरक्षित और अलग-अलग भुगतान प्रणालियों के बीच आसानी से काम करने वाले तरीके से स्वीकार करने में मदद मिल सकती है।
बोर्ड ने यह भी बताया है कि स्कूल बार-बार होने वाले भुगतानों को आसान बनाने के लिए अपने उद्यम संसाधन नियोजन (ईआरपी) सिस्टम को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़ सकते हैं। इसमें कर्मचारियों के वेतन जैसे नियमित भुगतान भी शामिल हो सकते हैं।