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CBSE Board Exam Result 2026: रिजल्ट का दबाव बच्चों पर न डालें, अभिभावकों को विशेषज्ञ की अहम सलाह

Fri, 13 Mar 2026 04:39 PM IST
Akash Kumar एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

CBSE Board Exam Result 2026: बोर्ड परीक्षा के बाद रिजल्ट का इंतजार कई छात्रों में तनाव पैदा कर देता है। नोएडा वर्ल्ड्स स्कूल की प्रधानाध्यापिका सुनीता खटाना ने कहा कि अभिभावक बच्चों पर अंकों और स्ट्रीम चयन का दबाव न डालें। बच्चों को आराम दें, उनकी रुचि के अनुसार निर्णय लेने में सहयोग करें और तुलना से बचें।
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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CBSE Board Exam Result 2026: 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाएं किसी भी विद्यार्थी के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होती हैं। परीक्षाएं समाप्त होने के बाद छात्रों और अभिभावकों की नजरें रिजल्ट पर टिक जाती हैं। इस दौरान कई छात्रों पर अच्छे अंक लाने का दबाव बढ़ जाता है और रिजल्ट का इंतजार उनके लिए मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण बन सकता है।

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ऐसे में यह सवाल उठता है कि बच्चों पर बढ़ते रिजल्ट के दबाव को कैसे कम किया जाए और अभिभावक इस समय उन्हें किस तरह सहयोग दे सकते हैं? इस विषय पर विशेषज्ञों का मानना है कि माता-पिता का व्यवहार और उनका समर्थन बच्चों के आत्मविश्वास को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
 

बच्चों में तनाव की स्थिति पैदा कर देता है रिजल्ट का इंतजार

रिजल्ट का इंतजार और भविष्य को लेकर अनिश्चितता अक्सर बच्चों में तनाव की स्थिति पैदा कर देती है। इस विषय पर चर्चा करते हुए नोएडा वर्ल्ड्स स्कूल, सेक्टर-48 की प्रधानाध्यापिका सुनीता खटाना ने कहा कि इस समय बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने में अभिभावकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
 

पहले से बच्चे का भविष्य तय करना गलत

उन्होंने बताया कि परीक्षा समाप्त होने के बाद बच्चों के मन में लगातार यह सवाल चलता रहता है कि उनका रिजल्ट कैसा आएगा। कई बार माता-पिता भी अनजाने में बच्चों पर अतिरिक्त दबाव बना देते हैं। उदाहरण के तौर पर, वे पहले से ही यह तय कर लेते हैं कि उनका बच्चा आगे चलकर साइंस या कॉमर्स स्ट्रीम ही चुनेगा और उसी दिशा में सोचने के लिए बच्चों पर दबाव डालते हैं। इससे बच्चों का तनाव और बढ़ सकता है।

सुनीता खटाना के अनुसार, अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को इस तरह के दबाव में न डालें। बच्चों को यह विश्वास दिलाना जरूरी है कि उन्होंने अपनी ओर से पूरी मेहनत की है और जो भी परिणाम आएगा, उसे सकारात्मक तरीके से स्वीकार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगली कक्षा में विषय या स्ट्रीम का चयन बच्चों की रुचि और उनकी क्षमता के अनुसार होना चाहिए, न कि केवल सामाजिक अपेक्षाओं के आधार पर।

परीक्षा खत्म होने के बाद बच्चे को आराम करने दें

उन्होंने यह भी सलाह दी कि परीक्षा खत्म होते ही बच्चों को तुरंत अगली कक्षा की पढ़ाई के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए। बच्चों को कुछ समय आराम और मानसिक रूप से तरोताजा होने का अवसर देना जरूरी है, ताकि वे आगे की पढ़ाई के लिए नए उत्साह के साथ तैयार हो सकें।

रिजल्ट की घोषणा वाले दिन बच्चे को एंग्जायटी का शिकार होने से बचाएं

रिजल्ट घोषित होने के समय बच्चों और अभिभावकों दोनों में उत्सुकता काफी बढ़ जाती है। ऐसे में कई बार बच्चे चिंता या एंग्जायटी का अनुभव करने लगते हैं। इस स्थिति में अभिभावकों को धैर्य बनाए रखना चाहिए और रिजल्ट देखने की प्रक्रिया को भी शांत और सकारात्मक तरीके से लेना चाहिए। बार-बार वेबसाइट पर रिजल्ट चेक करने की जल्दबाजी भी बच्चों में तनाव बढ़ा सकती है।

बच्चे की पसंद और रुचि से हो स्ट्रीम का चुनाव

प्रधानाध्यापिका ने यह भी कहा कि बच्चों को अपनी पसंद और रुचि के अनुसार स्ट्रीम चुनने का अवसर देना चाहिए। यदि जरूरत हो तो वे अपने शिक्षकों, अभिभावकों या अनुभवी लोगों से सलाह ले सकते हैं। सोशल मीडिया के प्रभाव में आकर या दूसरों को देखकर करियर से जुड़े निर्णय लेना उचित नहीं है। बच्चों को अपनी क्षमता और रुचि को समझते हुए सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए।

दूसरे बच्चों से तुलना न करें

उन्होंने अभिभावकों को यह भी सलाह दी कि अपने बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। हर बच्चे की क्षमता और रुचि अलग होती है। इसलिए माता-पिता को बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करनी चाहिए और उनके मन की बात समझने की कोशिश करनी चाहिए।
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ऐसे पहचानें बच्चा तनाव का शिकार तो नहीं

बच्चों में तनाव के संकेतों को पहचानना भी जरूरी है। यदि बच्चा अधिक चिड़चिड़ा हो गया है या अकेले रहने लगा है, तो यह संकेत हो सकता है कि वह किसी मानसिक दबाव में है। ऐसे समय में अभिभावकों को बच्चों को समझाना चाहिए कि केवल अंक ही जीवन की सफलता का पैमाना नहीं होते। असल मायने उनके प्रयास और मेहनत का होता है। नंबर किसी भी बच्चे की पूरी प्रतिभा को नहीं दर्शाते, इसलिए सकारात्मक सोच और सहयोगी माहौल बच्चों के आत्मविश्वास को बनाए रखने में मदद करता है।

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