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CBSE 12th Digital Evaluation: कॉपियों की डिजिटल जांच पर विवाद क्यों? इसपर सीबीएसई का क्या पक्ष? समझें मामला

Sat, 16 May 2026 12:47 PM IST
Shahin Praveen एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

CBSE 12th Digital Evaluation 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने इस साल ने कक्षा 12वीं की कॉपियों की पूर्ण डिजिटल जांच शुरू की। कॉपियां स्कैन होकर टीचर्स कंप्यूटर पर चेक करते हैं। लेकिन इसे लेकर सोशल मीडिया पर बच्चों और अभिभावकों में काफी नाराजगी देखी गई। आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह।
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CBSE 12th Digital Evaluation 2026 - फोटो : अमर उजाला, ग्राफिक
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विस्तार
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CBSE 12th Digital Evaluation: इस साल CBSE ने कक्षा 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए डिजिटल जांच प्रणाली (On-Screen Marking - OSM) लागू की है, जिसमें कॉपियों को स्कैन करके शिक्षक कंप्यूटर पर उनका मूल्यांकन करते हैं। इस नई व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया पर छात्रों और अभिभावकों के बीच काफी नाराजगी और बहस देखने को मिल रही है।  

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हालांकि बोर्ड ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर छात्रों की चिंताओं को देखते हुए स्पष्टीकरण दिया है। बोर्ड ने 15 मई को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक नोटिस जारी करते हुए कहा है कि OSM (On-Screen Marking) प्रणाली पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और एक समान तरीके से अंक देने वाली है। सीबीएसई ने कहा है कि यदि छात्र CBSE 12वीं परिणाम 2026 से संतुष्ट नहीं हैं, तो वे पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
 

क्यों हो रहा है विरोध?

सीबीएसई 12वीं के परिणाम घोषित होने के बाद सोशल मीडिया पर OSM (On-Screen Marking) प्रणाली को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, खासकर Physics, Chemistry, Biology और Mathematics जैसे विषयों में मिले अंकों को लेकर। बहुत से छात्रों का कहना है कि इन विषयों में उन्हें उम्मीद से लगभग 10-20% कम अंक मिले हैं। इस वजह से छात्रों में नाराजगी और सिस्टम को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
 
कुछ मामलों में JEE Main क्वालीफाई करने वाले छात्रों के भी बोर्ड में कम अंक या फेल होने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे सिस्टम पर सवाल उठ रहे हैं।

इसके अलावा कई और कारण भी बताए जा रहे हैं। जैसे-स्कैन की गई कॉपियों में कुछ पेज या उत्तर छूट जाने का शक, डिजिटल जांच में तकनीकी गड़बड़ियों की आशंका, और इस बात की चिंता कि मूल्यांकन में पारदर्शिता पूरी तरह समझ में नहीं आ रही।

स्कैन की हुई कॉपियों को मुफ्त में न देने पर सवाल

इस पर कई यूजर्स की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उनका कहना है कि CBSE की डिजिटल जांच (OSM) पर उन्हें भरोसा नहीं है। उनका सवाल है कि अगर बोर्ड वास्तव में प्रक्रिया को निष्पक्ष मानता है, तो छात्रों को उनकी स्कैन की हुई कॉपियां मुफ्त में क्यों नहीं दी जातीं और उन्हें देखने के लिए पैसे (लगभग 700 रुपये) क्यों लिए जाते हैं। उनका मानना है कि यह छात्रों, खासकर मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए ठीक नहीं है।




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क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम?

सीबीएसई के अनुसार ओएसएम यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को इसलिए लागू किया गया ताकि उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में पारदर्शिता और एकरूपता बनी रहे। इस प्रणाली के तहत परीक्षकों को स्टेप-बाय-स्टेप मार्किंग करनी होती है, जिससे हर उत्तर का निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित किया जा सके।

3.19% की आई गिरवाट

इस वर्ष CBSE 12वीं परीक्षा 2026 में पास प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई है। कुल उत्तीर्ण प्रतिशत इस बार 85.2% रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 88.39% था। इस तरह पास प्रतिशत में लगभग 3.19% की कमी आई है।

शिक्षकों ने किया OSM का समर्थन

CBSE के अनुसार, देशभर के कई शिक्षकों ने OSM (On-Screen Marking) प्रणाली का स्वागत किया है और इसे मूल्यांकन प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका मानना है कि इससे उत्तरपुस्तिकाओं की जांच और अंक अपलोडिंग में होने वाली गलतियों में कमी आई है, जिससे छात्रों के प्रदर्शन का अधिक सटीक मूल्यांकन संभव हो सका है।

शिक्षकों ने यह भी कहा कि डिजिटल मूल्यांकन के कारण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और जवाबदेह बनी है। शुरुआत में प्रशिक्षण के बाद यह प्रणाली उनके लिए आसान और उपयोगकर्ता अनुकूल साबित हुई। साथ ही, पेपरलेस व्यवस्था को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया गया है, जिससे छात्रों और अभिभावकों का परिणामों पर भरोसा और मजबूत होगा।

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