याचिका में बताई गई सही व्यवस्था और मार्गदर्शन की कमी
याचिका में बताया गया था कि छात्रों में पढ़ाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सही व्यवस्था और व्यवस्थित करियर मार्गदर्शन की भारी कमी है। इसी वजह से कई छात्र तनाव, चिंता और भविष्य को लेकर भ्रम जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। याचिका में मांग की गई थी कि स्कूलों में योग्य काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य की जाए और छात्रों के लिए एक समान मानसिक सहयोग प्रणाली बनाई जाए।
हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद लिया गया फैसला
सितंबर 2025 में इस मामले की सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने सीबीएसई, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और राज्य सरकार से जवाब और सुझाव मांगे थे।
सभी पक्षों की बात सुनने और सुझावों पर विचार करने के बाद सीबीएसई ने 19 जनवरी 2026 को एक सर्कुलर जारी कर नियमों में जरूरी बदलाव लागू किए।
नए नियमों में क्या-क्या बदलाव किए गए हैं?
सीबीएसई ने क्लॉज 2.4.12 में दो नए उप-क्लॉज जोड़े हैं-
काउंसलिंग और वेलनेस टीचर अनिवार्य
- अब हर सीबीएसई स्कूल में 500 छात्रों पर एक नियमित काउंसलिंग और वेलनेस टीचर (सोशियो-इमोशनल काउंसलर) की नियुक्ति जरूरी होगी।
करियर काउंसलर की नियुक्ति भी जरूरी
- सभी स्कूलों में करियर काउंसलर रखना अनिवार्य होगा, जो छात्रों को सही विषय, कोर्स और करियर विकल्प चुनने में मदद करेगा।
पहले के नियमों के अनुसार केवल उन्हीं स्कूलों में फुल-टाइम साइकोलॉजिकल काउंसलर जरूरी था, जहां कक्षा 9 से 12 तक 300 से अधिक छात्र होते थे। छोटे स्कूलों को पार्ट-टाइम काउंसलर रखने की अनुमति थी। अब यह व्यवस्था बदल दी गई है।
काउंसलिंग और वेलनेस टीचर की योग्यता
काउंसलिंग और वेलनेस टीचर बनने के लिए मनोविज्ञान (Psychology) में स्नातक या परास्नातक डिग्री या सोशल वर्क (Social Work) में परास्नातक डिग्री, जिसमें मेंटल हेल्थ या काउंसलिंग में विशेषज्ञता हो अनिवार्य है। इसके साथ सीबीएसई से मान्यता प्राप्त 50 घंटे का प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा करना अनिवार्य होगा। इनकी जिम्मेदारियों में शामिल होगा-
- छात्रों और अभिभावकों की काउंसलिंग करना
- बच्चों में सामाजिक और भावनात्मक समझ विकसित करना
- मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की पहचान करना
- आपात स्थिति में सहायता देना
- शिक्षकों और माता-पिता को जागरूक करना
- गोपनीयता और नैतिक नियमों का पालन करना
छोटे स्कूलों के लिए विशेष व्यवस्था
सीबीएसई ने छोटे स्कूलों को सुविधा देने के लिए काउंसलिंग हब और स्पोक मॉडल (Counselling Hub and Spoke Model) लागू किया है। इसके तहत बड़े स्कूल (हब) अपने आसपास के छोटे स्कूलों (स्पोक) को काउंसलिंग से जुड़ी सेवाओं में सहयोग देंगे।
करियर काउंसलर के लिए नियम
कक्षा 9 से 12 तक 500 छात्रों पर एक करियर काउंसलर अनिवार्य योग्यता में मानविकी, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, प्रबंधन, शिक्षा या प्रौद्योगिकी (Humanities, Science, Social Science, Management, Education, Technology) में स्नातक या परास्नातक डिग्री शामिल है।
याचिकाकर्ता और वकीलों की प्रतिक्रिया
याचिकाकर्ता वकील सुजीत स्वामी ने कहा कि इस याचिका का उद्देश्य प्राइमरी से लेकर सीनियर सेकेंडरी तक के छात्रों की मानसिक जरूरतों को पूरा करना था। उन्होंने खासतौर पर कक्षा 10 के बाद विशेषज्ञ करियर मार्गदर्शन की जरूरत पर जोर दिया था।
उन्होंने बताया कि अब सीबीएसई द्वारा ये बदलाव लागू कर दिए गए हैं और उम्मीद है कि राजस्थान बोर्ड (RBSE) से जुड़े स्कूलों में भी इसी तरह के सुधार किए जाएंगे।
राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ता अमित दाधीच ने इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए भी एक मजबूत मानसिक स्वास्थ्य प्रणाली बनाने को लेकर अदालत में प्रयास चल रहे हैं और इसके सकारात्मक परिणाम जल्द देखने को मिल सकते हैं।