98.66 लाख से अधिक कॉपियां हुईं चेक
बोर्ड के अनुसार, इस नई व्यवस्था के तहत कुल 98,66,622 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया गया। सीबीएसई का कहना है कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत पारदर्शिता, दक्षता और छात्र-केंद्रित सुधारों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
क्या है ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) व्यवस्था?
ऑन स्क्रीन मार्किंग एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है, जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कंप्यूटर स्क्रीन पर की जाती है। इस प्रक्रिया में परीक्षकों को उत्तर पुस्तिकाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाती हैं और उन्हें भौतिक रूप से कॉपियां भेजने की आवश्यकता नहीं होती।
सीबीएसई के मुताबिक, इस प्रणाली के जरिए देश और विदेश में स्थित संबद्ध स्कूलों के शिक्षक किसी भी स्थान से उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर सकते हैं। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया तेज और अधिक सुरक्षित बनी है।
ओएसएम प्रणाली के प्रमुख फायदे
सीबीएसई ने बताया कि ऑन स्क्रीन मार्किंग से कई महत्वपूर्ण लाभ मिले हैं। इस प्रणाली ने मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाया है।
गोपनीयता बनी रहती है: ओएसएम प्रणाली में उत्तर पुस्तिकाओं को मूल्यांकन केंद्रों तक भौतिक रूप से भेजने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे कॉपियों की सुरक्षा और गोपनीयता बनी रहती है। देश और विदेश के किसी भी सीबीएसई संबद्ध स्कूल से मूल्यांकन संभव हो जाता है।
त्रुटियों में कमी: डिजिटल प्रक्रिया के कारण अंकों के जोड़, पोस्टिंग और अपलोडिंग से जुड़ी गलतियां पूरी तरह खत्म हो जाती हैं। इससे छात्रों के परिणाम अधिक सटीक बनते हैं।
हर उत्तर का पूरा मूल्यांकन: सीबीएसई के अनुसार, ओएसएम यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक उत्तर का मूल्यांकन निर्धारित मार्किंग स्कीम के अनुसार हो। इससे किसी प्रश्न के छूटने या अधूरे मूल्यांकन की संभावना नहीं रहती।
मानवीय हस्तक्षेप कम: इस प्रणाली में मैनुअल प्रक्रिया कम होने से निष्पक्षता बढ़ती है। परीक्षक केवल तय मानकों के अनुसार अंक देते हैं, जिससे मूल्यांकन अधिक वस्तुनिष्ठ बनता है।
समय और मेहनत की बचत: ऑन स्क्रीन मार्किंग से शिक्षकों का मैनुअल काम कम हुआ है। अब उन्हें अंकों के जोड़ या अपलोडिंग जैसे कार्यों में समय नहीं देना पड़ता और वे मूल्यांकन की गुणवत्ता पर ज्यादा ध्यान दे सकते हैं।
पर्यावरण के लिए बेहतर: सीबीएसई ने इसे पर्यावरण के अनुकूल कदम बताया है। डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया पेपरलेस व्यवस्था को बढ़ावा देती है और संसाधनों की बचत करती है।
पारदर्शिता और भरोसा: बोर्ड का कहना है कि ओएसएम से छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों के बीच परीक्षा प्रणाली को लेकर विश्वास बढ़ा है। डिजिटल रिकॉर्ड होने से जवाबदेही भी मजबूत हुई है।
शिक्षकों ने किया ओएसएम का स्वागत
सीबीएसई के अनुसार, देशभर के शिक्षकों ने सीबीएसई की इस नई व्यवस्था का स्वागत किया है। शिक्षकों का मानना है कि यह मूल्यांकन प्रक्रिया को आधुनिक बनाने वाला बड़ा कदम है।
शिक्षकों के अनुसार, ओएसएम से अंकों की गणना और अपलोडिंग में होने वाली गलतियां समाप्त हुई हैं। इससे छात्रों के प्रदर्शन का सही आकलन संभव हो पाया है। कई परीक्षकों ने कहा कि डिजिटल प्रक्रिया के कारण मूल्यांकन अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बना है।
शिक्षकों ने यह भी बताया कि शुरुआत में उन्हें प्रशिक्षण दिया गया था, लेकिन बाद में यह प्रणाली काफी आसान और उपयोगकर्ता अनुकूल साबित हुई।
इसके अलावा, शिक्षकों ने पेपरलेस मूल्यांकन प्रक्रिया को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक पहल बताया है। उनका मानना है कि इससे छात्रों और अभिभावकों का परीक्षा परिणामों पर भरोसा और मजबूत होगा।