पावर स्किल्स क्यों हैं जरूरी
पावर स्किल्स की खास बात यह है कि ये केवल एक नौकरी या प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हर भूमिका, प्रोजेक्ट और इंडस्ट्री में कारगर साबित होते हैं। इसका प्रमाण 1918 में कार्नेगी फाउंडेशन के ए स्टडी ऑफ इंजीनियरिंग एजुकेशन रिपोर्ट में भी मिलता है। इसमें यह बताया गया है कि इंजीनियरिंग के क्षेत्र से जुड़े किसी पेशेवर की सफलता में 85 फीसदी योगदान उनके व्यक्तित्व और संवाद से जुड़े कौशल का होता है, जबकि महज 15 प्रतिशत योगदान तकनीकी ज्ञान या हार्ड स्किल्स का।
यही कारण है कि आजकल हर नियोक्ता चाहता है कि उसके पास मजबूत ‘पावर स्किल्स’ वाले पेशेवर हों, ताकि कंपनी को लाभ हो सके।
सिर्फ बदलाव को ही न स्वीकारें
सबसे पहला पावर स्किल है अनुकूलनशीलता, जिसका अर्थ सिर्फ बदलाव को स्वीकार करना नहीं, बल्कि बदलती परिस्थितियों में तुरंत और सही ढंग से सोचना, महसूस करना और काम करना है। आज के युवाओं के लिए यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि आज हर संगठन को समस्या सुलझाने, नए बाजार या तकनीकी बदलावों से जूझने के लिए तैयार रहना ही पड़ता है। जिन पेशेवरों में यह गुण होता है, वे बदलावों का बेहतर तरीके से सामना कर पाते हैं और एआई जैसी तकनीकी क्रांतियों के साथ खुद को तेजी से ढाल लेते हैं।
जमीनी हकीकत को भी समझें
दूसरों की भावनाओं, उनकी सोच और जरूरतों को समझना और उसका आदर करना दूसरा महत्वपूर्ण पावर स्किल है, जो सहानुभूति कहलाता है। सहानुभूति रखने वाले पेशेवर सिर्फ डाटा या टारगेट के हिसाब से फैसले नहीं लेते, बल्कि टीम के लोगों की भावनाओं और जमीनी हकीकत को भी समझते हैं। इससे टीम का भरोसा बढ़ता है, रिश्ते मजबूत होते हैं और ऑफिस का माहौल सकारात्मक बनता है।
हरेक की सोच का सम्मान
तीसरे सबसे जरूरी पावर स्किल समावेशिता का मतलब है हर किसी की बात सुनना, विविध टीमों के साथ मिलकर काम करना और सबको बराबरी का मौका देना। जो लीडर अपनी टीम में खुलकर बातचीत करने और टीमवर्क का माहौल बनाते हैं, वहां नए विचार ज्यादा आते हैं, तेजी से बदलाव होता है और सही फैसले लिए जाते हैं। अलग-अलग सोच वाले लोगों से टीम में नवाचार की भावना और कार्यक्षमता, दोनों बढ़ती है। - द कन्वर्सेशन