तालमेल है जरूरी
हर कोई अपने काम के प्रति जुनूनी नहीं होता है। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि काम के प्रति जुनून दो तरह का होता हैः सामंजस्यपूर्ण और जुनूनी। सामंजस्यपूर्ण जुनून तब होता है, जब कोई व्यक्ति अपनी नौकरी से प्यार करते हुए भी जीवन के अन्य पहलुओं के साथ बेहतर तालमेल और संतुलन बनाए रखता है। ऐसे लोगों का उनके काम पर नियंत्रण होता है।
दूसरी ओर, जुनूनी जुनून वाले व्यक्तियों का काम उनके जीवन पर हावी हो जाता है। ऐसे व्यक्ति अक्सर पदोन्नति या वेतन पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं। इसलिए ऐसी नौकरी का लक्ष्य रखें, जिससे जीवन में संतुलन बना रहे और इस बात पर विचार करें कि आपका व्यक्तित्व काम के साथ आपके बाकी रिश्ते को कैसे प्रभावित करता है।
व्यक्तित्व की भूमिका
आपका व्यक्तित्व काम के प्रति आपके जुनून के प्रकार को निर्धारित करने में बड़ी भूमिका निभाता है। जो लोग आसानी से परेशान होने वाली प्रवृत्ति के होते हैं, उनमें जुनूनी जुनून विकसित होने की अधिक संभावना होती है, खासकर उन नौकरियों में, जिनमें बहुत अधिक दवाव या प्रतिष्ठा पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
दूसरी ओर, संतुलित दृष्टिकोण और जोशीले इन्सान की नौकरी और जीवन में तनाव कम और संतुलन ज्यादा होता है। अत्यधिक दबाव से बचने के लिए आपको यह समझना होगा कि आपके पास अपनी नौकरी के लिए किस तरह का जुनून है। बेहतर होगा कि आप जीवन के तराजू के एक पलड़े पर पेशेवर काम को रखें और दूसरे पलड़े पर अन्य व्यक्तिगत चीजों को। यह भी ध्यान रखें कि दोनों पलड़ों का संतुलन बना रहे।
बदलाव पर विचार
अगर आपको लगता है कि काम के प्रति आपका मिजाज जुनूनी तरह का है और उस पर आपका नियंत्रण नहीं है या आप अपनी सफलताओं का आनंद नहीं ले पा रहे हैं, तो आपको अपने कॅरिअर में बदलाव करने पर विचार करना चाहिए। आपको ऐसी भूमिका की तलाश करनी चाहिए, जिसमें कलात्मक या सामाजिक तत्व अधिक हों।
आप अपना व्यक्तित्व तो नहीं बदल सकते, लेकिन नौकरी बदलने से आपको ज्यादा संतुष्टि, संतुलन और काम के अलावा अपने जुनून को आगे बढ़ाने का मौका मिल सकता है। इसलिए अपने व्यक्तित्व के अनुरूप नौकरी की तलाश करें।