हालांकि नतीजों की घोषणा होने से पहले ही खबर है कि कक्षा 12वीं के 469279 छात्र फेल हो गए हैं। इन छात्रों ने बोर्ड परीक्षा बीच में ही छोड़ दी थी। बोर्ड के नियमों के मुताबिक 12वीं में एक विषय में फेल होने पर परीक्षार्थी को फेल माना जाता है। लिहाजा जिन छात्रों ने परीक्षा छोड़ दी है वह सभी फेल हो गए हैं।
कक्षा 10वीं-12वीं परीक्षा के लिए पंजीकृत 66.37 लाख परीक्षार्थियों में से 11.29 लाख (17 प्रतिशत) ने परीक्षा बीच में ही छोड़ दी थी। इनमें 469279 कक्षा 12वीं के हैं जिनका फेल होना तय है। 10वीं की परीक्षा छोड़ने वाले 660507 छात्र-छात्रओं में से भी बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों के फेल होने की आशंका है। सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में परीक्षा होने के कारण पिछले सालों की तरह अंधाधुंध नकल नहीं हो सकी।
कुछ स्कूलों जहां सीसीटीवी कैमरे में वॉयस रिकार्डर नहीं था, वहां बोल-बोल कर नकल कराने की कोशिश हुई लेकिन गणित, अंग्रेजी व विज्ञान जैसे विषयों में यह फॉर्मूला भी काम नहीं आया। यही कारण था कि बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों ने कॉपियां खाली छोड़ दी थी।
परीक्षकों की मानें तो मूल्यांकन के दौरान परीक्षार्थियों को पास होने लायक नंबर तक नहीं मिल पाए हैं। इस बार परीक्षा में नकल पर उचित लगाम लगी थी। निश्चित रूप से रिजल्ट कम रहेगा क्योंकि बच्चों को इतनी सख्ती का अनुमान नहीं था। सरकार से उम्मीद है कि शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए भी कड़े कदम उठाएगी।