इन स्किल्स पर दें ध्यान
डिग्री के साथ कुछ व्यावहारिक कौशल भी जरूरी हैं, जैसे-पाइथन और सी प्रोग्रामिंग, एम्बेडेड सिस्टम, रोबोटिक्स, ड्रोन तकनीक, मशीन लर्निंग, सैटेलाइट डाटा विश्लेषण और 3डी प्रिंटिंग। इन कौशल से छात्र अपनी तकनीकी क्षमता मजबूत कर सकते हैं और नए समाधान विकसित करना सीखते हैं।
सीखने के कई अवसर
पढ़ाई के साथ अतिरिक्त प्रशिक्षण भी युवाओं को आगे बढ़ने में मदद करता है। इसरो, आईआईआरएस और आईआईएसटी के अलावा कई आईआईटी, एनआईटी और विश्वविद्यालय समय-समय पर स्पेस टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट डिजाइन, ड्रोन, रिमोट सेंसिंग और एयरोस्पेस से जुड़े अल्पकालिक सर्टिफिकेट प्रोग्राम, हैकाथॉन और तकनीकी कार्यशालाएं आयोजित करते हैं। ऐसे कार्यक्रम छात्रों को नई तकनीक सीखने के साथ उद्योग के विशेषज्ञों से जुड़ने का अवसर भी देते हैं।
स्टार्टअप शुरू करने में भी मिल रही मदद
यदि आज किसी युवा के पास अच्छा विचार है, तो उसे अकेले आगे बढ़ने की जरूरत नहीं है। इन-स्पेस, स्टार्टअप इंडिया, अटल इनोवेशन मिशन, विभिन्न आईआईटी और आईआईएसटी के इनक्यूबेशन सेंटर, टी-हब जैसे संस्थान नए उद्यमियों को मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता और उद्योग से जुड़ने का अवसर दे रहे हैं। कई सफल स्पेस स्टार्टअप की शुरुआत भी कॉलेज प्रोजेक्ट या छोटी टीम से हुई थी।