Science Education: दूरदराज के गांवों तक स्कूलों में अटल टिकरिंग और साइंस लैब की पहुंच से बेटियों के लिए साइंस अब मनपसंद विषय बनकर उभरा है। वर्ष 2022 तक बेटियां बीएड करके शिक्षिका बनने के लिए 11वीं में कक्षा में विषयों का चयन करती थी। लेकिन, अब इस ट्रेंड में बदलाव आया है। छात्रों के इसी रुझान को देखते हुए सरकार ने राज्यों से साइंस विषयों में सीटें बढ़ाना को पत्र लिखा है।
अब बेटियां साइंस स्ट्रीम को सबसे अधिक तबज्जो दे रही हैं। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उच्च शिक्षा में साढ़े चार करोड़ छात्रों में से 1,01,88,988 ने स्टेम स्ट्रीम तो अन्य साइंस विषयों में 55,55,120 से अधिक छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। जबकि स्कूलों में दो साल में साइंस विषयों में छात्रों के इनरोलमेंट में करीब 10 लाख की बढ़ोतरी हुई है। वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, साइंस क्षेत्र में रोजगार और शोध की अपार संभावनाओं के कारण छात्रों में रुझान बढ़ा है। इसमें भी बेटियां सबसे आगे हैं।
लगातार बढ़ रही बेटियों की भागीदारी
सरकार द्वारा जून 2026 में जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में स्टेम स्ट्रीम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी और गणित) में बेटियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। स्कूलों में वर्ष 2022 में साइंस स्ट्रीम में बेटियों का आंकड़ा महज 23.3 लाख था। यह साल 2024 तक 28.1 लाख पार कर गया। 12वीं पासआउट छात्रों में साइंस स्ट्रीम में करीब 10 लाख की बढ़ोतरी है। दूरदराज के स्कूलों में अटल टिकरिंग व साइंस लैब, शिक्षकों की उपलब्धता के कारण अब साइंस स्ट्रीम लड़कियों की पहली पसंद बन चुकी है। ऐसे में बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए साइंस स्ट्रीम की सीट बढ़ाने पर काम करने की जरूरत है।