सफलता डॉट कॉम द्वारा यूजर इंटरफेस(UI) और यूजर एक्सपीरिएंस(UX) विषय पर आयोजित किये गए मास्टर क्लास सेशन में गेस्ट स्पीकर मैजिकपिन कंपनी में असिस्टेंट वाइस प्रेसीडेंट अरिहंत जैन ने कहा कि यूजर इंटरफेस कुछ ऐसा जिसे आप छू सकते हो, उसके साथ इंटरेक्ट करते हो। जैसे आपको खाना ऑर्डर करना है तो आप उस कंपनी की एप पर जाकर जिन बटन्स को आप टच करते हैं। आप बैनर देखते हैं, प्रोडक्ट इमेज देखते हैं जिसे आप टच करते देखते है तो इसे यूजर इंटरफेस कहते हैं। वहीं यूजर एक्सपीरिएंस अलग चीज है आपको भूख लगने से लेकर घर पर खाना डिलीवर होने तक की जो जर्नी है जिसमें आपने खाना ऑर्डर किया, डिलीवरी वाला घर आया खाना लेकर, आपको खाना देकर गया।
देश में अच्छा एप कौन सा है सवाल पर जवाब में उन्होंने कहा कि ऐसा कोई एप जो आपकी दैनिक जरूरतें पूरी कर रहा हो। सेवाएं जिसकी बेहतर हों। यूजर एक्सपीरिएंस जिसका अच्छा हो अच्छा एप कहा जा सकता है। क्योंकि हर आय वर्ग, हर आयु वर्ग के लोगों की दैनिक समस्याएं भिन्न भिन्न हो सकती हैं। जैसे कोई 70 साल का बुजुर्ग आदमी है तो उसकी जरूरतें एक युवा के मुकाबले बिल्कुल अलग होंगी। बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर तुरंत उपचार की जरूरत होती है, या फिर कोई एप बुजुर्ग को टाइम पर दवाई लेने के लिए रिमाइंडर्स दे सकता है तो वह बेहतर एप कहा जा सकता है। इसी तरह वर्किंग क्लास के लिए अगर कोई युवा जो घर का बना खाना चाहता है बाहर के अन हाइजीनिक खाने से उसे परहेज है और वो एप उसे घर का बना खाना मुहैया करा सकता है तो वो एप बढ़िया है। ऐसे लोग जो ज्यादा पढ़े लिखे नहीं है एप के यूजर इंटरफेस को समझ का उसका इस्तेमाल कर ले रहे हैं तो वो एप उनके लिये बेहतर है। इसी तरह अलग अलग लोगों के लिये उनकी जरूरत के हिसाब से एप अच्छे होते हैं। इसी तरह स्वास्थ्य क्षेत्र की एप्स में अगर कोई एप लोगों को उनके अर्ली सिम्टम्प्स पर ही बीमारी के बारे में बता देगी तो वो एक बेहतर होगी। क्योंकि आज भी भारत में बीमार लोगों की मौतें इसलिये अधिक हैं क्योंकि उन्हें अर्ली स्टेज में बीमारी का पता नहीं चल पाता।
यूजर इंटरफेस बेहतर करने के लिए कंपनियों को यूजर्स से फीडबैक लेने को उन्होंने जरूरी बताया। अरिहंत जैन ने कहा कि हमें हमेशा यूजर की जरूरत को ध्यान में रखते हुए ग्राफिक डिजाइन करना चाहिए। उन्होंने युवाओं को 20 साल से चली आ रही ई कॉमर्स इंडस्ट्री के बारे में बताया कि कैसे लोगों का अनुभव बदल रहा है। टेक्नोलॉजी ने कैसे चीजों को आसान किया है। जिसमें उन्होंने मुबई डब्बा वाला का उदाहरण दिया जो 1890 से लोगों को 1890 से वर्किंग क्लास को घर का बना खाना पहुंचा रहे हैं। इसके बाद जैन ने 1994 में दिये गए पहले ऑनलाइन ऑर्डर के बारे में बताया। यूआई यूएक्स में जॉब के लिए उन्होंने लाखों अवसर बताये और कहा कि आप यूजर फ्लो को समझें। कस्टमर फर्स्ट की सोच पर आप चलियेगा। निश्चित रूप से आपको सफलता मिलेगी।
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