टेलीकॉम इंडस्ट्री में 'जियो' की एंट्री के बाद मचा उथल-पुथल आज की तारीख में मैनेजमेंट संस्थानों के लिए केस स्टडी का विषय बना हुआ है। इसमें पता लगाया जा रहा है कि कैसे सस्ती सेवा, कंपनियों के मर्जर, मुफ्त सेवा और जॉब की कमी बाजार में तहलका ला सकती है। आपको बता दें कि पिछले 6 महीनों में टेलीकॉम कंपनियों ने कैसे खुद को बाजार में बचाए रखने की होड़ में रोज नए-नए फैसले लिए हैं। अब जियो जैसे प्लान से कैसे निपट सकते हैं इन पर संस्थानों पर पढ़ाई कराई जा रही है।
आईआईएम, एक्सएलआरआई, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, एसपी जैन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च और अन्य दूसरे बड़े कॉलोजों के प्रोफेसरों की मानें तो इस उथल-पुथल के दौरान टेलीकॉम इंडस्ट्री ने छात्रों को समझने के लिए हर तरह के उदाहरण पेश किए हैं जिनमें कैसे मानव संसाधन को संभाला जाए, कंपनियों के बीच मर्जर, मार्केटिंग स्ट्रेटेजी, बिजनेस मॉडल और प्राइसिंग आदि शामिल हैं जो कि मैनेजमेंट कोर्स का हिस्सा हैं।
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टेलीकॉम के क्षेत्र में रेगुलेशन अहम
इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक आईआईएम बेंगलुरु में कॉर्पोरेट स्ट्रेटेजी के प्रोफेसर एस रधुनाथ कहते हैं, "टेलीकॉम सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए रणनीतिक महत्व रखता है क्योंकि नई तकनीक और नए कम्युनिकेशन के ऑप्शन तैयार करता है और टेलीकम्युनिकेशन सूचना और ट्रांजेकशन कॉस्ट कम करने में कारगर हो सकता है।"
टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया और ऑपरेटर्स के बीच हुए मनमुटाव के बारे में भी मैनेजमेंट कॉलेजों में चर्चा हो रही है। प्रोफेसर रघुनाथ ने इस बात का जिक्र किया कि इंटरनेट के क्षेत्र में काम और टेलीकॉम के क्षेत्र में ज्यादा रेगुलेशन कितना महत्वपूर्ण है।
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टेलीनोर ने अपना इंडिया यूनिट एयरटेल को बेचा
वहीं इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस में इंडस्ट्री में हुए इस बदलाव को मार्केटिंग के नजरिए से पढ़ाया जा रहा है। आईआईएम कोलकाता में टेलीकॉम इंडस्ट्री में विश्वस्तरीय कंपनियों के इंडिया में मार्केट और इस पर प्रभाव को बताया जा रहा है।
आपको बता दें कि पिछले साल यूके बेस्ड कंपनी वोडाफोन ग्रुप ने तकरीबन 4.4 बिलियन यूरो के बिजनेस को कम कर दिया। वहीं टेलीनोर ने अपने इंडिया यूनिट को एयरटेल को बेच दिया। साथ ही पिछले काफी लंबे वक्त से टाटा ग्रुप और डोकोमो के बीच चल रहे लीगल झगड़े के खत्म होते ही डोकोमो भी अपना बिजनेस खत्म कर देगा।
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