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MP Student: आदिवासी छात्रों को मिलेगा बेहतर शैक्षणिक माहौल, एमपी सरकार तीन साल में शिक्षा सुविधाएं करेगी मजबूत

Wed, 31 Dec 2025 09:09 AM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

MP Tribal Education: मध्य प्रदेश सरकार ने आदिवासी छात्रों की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए तीन साल की एक ठोस योजना तैयार की है। इस योजना के तहत स्कूलों और छात्रावासों में सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि आदिवासी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और समान शैक्षणिक माहौल मिल सके।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
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विस्तार
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Tribal Students: मध्य प्रदेश सरकार आने वाले तीन वर्षों में आदिवासी छात्रों के लिए शिक्षा सुविधाओं का दायरा बढ़ाएगी, ताकि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान और बेहतर पहुंच मिल सके। राज्य के जनजातीय मामलों के मंत्री कुंवर विजय शाह ने मंगलवार को यह जानकारी दी और कहा कि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाने जा रही है।

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विभाग की दो साल की उपलब्धियों पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि अगले तीन वर्षों में "गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुंच" सुनिश्चित करने के लिए बुनियादी ढांचे, स्मार्ट कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और पुस्तकालय सुविधाओं को उन्नत किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक आदिवासी विकास खंड में संदीपानी स्कूल, एकलव्य स्कूल, माता शबरी बालिका शिक्षा परिसर और लड़कों के लिए मॉडल आवासीय स्कूल स्थापित किए जाएंगे।

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आदिवासी संस्कृति और आजीविका को बढ़ावा देने पर फोकस

मंत्री कुंवर विजय शाह के अनुसार, आदिवासी धार्मिक और पूजा स्थलों का उन्नयन किया जाएगा और आदिवासी समुदाय की सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 86 आदिवासी विकास खंडों में कला केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

शाह ने बताया कि दिंडोरी जिले की गोंड चित्रकला को भौगोलिक संकेत (जीआई) प्राप्त हो चुका है, जबकि सात अन्य उत्पादों - भील जनजाति की गुलशन माला और बोलनी, पिथोरा चित्रकला शैली, झाबुआ आदिवासी गुड़िया, और गोंड जनजाति के वाद्य यंत्र बाना चिकारा और लकड़ी के मुखौटे शिल्प - के जीआई टैगिंग की प्रक्रिया चल रही है।

गुजरात के केवडिया में चल रहे आदिवासी महिला कैफेटेरिया की तर्ज पर पचमढ़ी, मांडू, कान्हा-किसली, पेंच और बांधवगढ़ में कैफेटेरिया का निर्माण किया जा रहा है। इन सुविधाओं का संचालन आदिवासी स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा किया जाएगा, जिससे उन्हें आजीविका के अवसर मिलेंगे और साथ ही आदिवासी संस्कृति को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।
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