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स्कूलों में मिड डे मील की जांच करेगी 'मां'

Thu, 18 May 2017 01:58 PM IST
amarujala.com - presented by: पूर्णिमा आचार्य
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परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को दिए जाने वाले दूध, फल एवं भोजन की जांच अब मां करेगी। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय में 6-6 माताओं का समूह बनाया जाएगा। इस समूह को ही 'मां' का नाम दिया गया है। शिक्षा निदेशालय ने प्राथमिक विद्यालयों में 20 मई से शुरू हो रहे ग्रीष्मावकाश तक इस समूह के गठन का आदेश दिया है ताकि अवकाश के बाद विद्यालय खुलने पर माताएं तुरंत अपनी जिम्मेदारी संभाल सकें।
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भोजन में होता है गोलमाल

परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को दिए जाने वाले दूध, फल, भोजन आदि में बड़ा गोलमाल होता है। शासन से लेकर शिक्षा विभाग के अफसर तक इससे भलीभांति वाकिफ हैं। बच्चों को पौष्टिक भोजन बराबर उपलब्ध होता रहे इसके लिए समय-समय पर दिशा निर्देश भी जारी किए जाते हैं और अफसर औचक निरीक्षण भी करते हैं। बावजूद इसके व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो पा रही है। सरकार प्राथमिक विद्यालयों में इस व्यवस्था को बेहतर करने के लिए लगातार प्रयासरत है ताकि विद्यालय आने वाले बच्चों की संख्या में इजाफा हो।
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स्कूल की दीवार पर लिखा होगा मां का नाम

ऐसे में इन विद्यालयों में खाने-पीने के सामान की गुणवत्ता एवं मेन्यू के परीक्षण की जिम्मेदारी 'मां' समूह को देने का निर्णय लिया गया है। निदेशालय का फरमान जारी होने के बाद बीएसए हरिकेश यादव ने पिछले सप्ताह इस संबंध में ग्रामीण एवं नगर क्षेत्र के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी किया। इसमें कहा गया कि हर 'मां' समूह में शामिल किए जाने वाली माताएं ऐसी हों जिनके बच्चे उस विद्यालय में पढ़ रहे हैं। इन माताओं का नाम विद्यालय की दीवार पर लिखवाया जाए।

'मां' समूह की माताएं प्रत्येक कार्यदिवस में विद्यालय आएंगी और उनकी उपस्थिति का रजिस्टर प्रधानाध्यापक तैयार करेंगे। दूध, फल, भोजन की गुणवत्ता जांचने के साथ मां ये भी परीक्षण करेंगी कि उपस्थित बच्चों के सापेक्ष ही मिड डे मील पंजिका में दर्ज की गई है या नहीं।
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