जेएनयू ,में एमफिल और पीएचडी की सीटों में कटौती को लेकर गुरुवार को यूनिवर्सिटी के अंदर छात्रों ने अपना विरोध दर्ज कराया जबकि एचआरडी मिनिस्टर के जवाब ने इस तरह की अटकलों पर विराम लगा दिया।
राज्य सभा में सवालों के जवाब के दौरान एचआरडी मिनिस्टर प्रकाश जावड़ेकर ने ये साफ किया कि जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में एमफिल और पीएचडी की सीटों में कोई कटौती नहीं की जा रही है। उन्होंने बताया कि हमारी सरकार पर दलित विरोधी होने के आरोप लगते रहे हैं लेकिन ऐसी कोई बात नहीं है।
"जेएनयू में प्रोफेसर के करीब 350 पद खाली पड़े हैं, जिनमें 200 पद अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए आरक्षित हैं। इन पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है", जावड़ेकर ने बताया।
साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि, सरकार उच्च शिक्षा में गुणवत्ता में सुधार पर लगातार काम कर रही है। इसके लिए यूजीसी समय-समय पर दिशा निर्देश जारी करता रहता है। यूजीसी की अधिसूचना 2016 में पीएचडी और एमफिल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए परीक्षा का प्रावधान किया गया है। जिसके तहत शोध छात्रों और गाइड के अनुपात में बदलाव किया गया है, ताकि गुणवत्ता में सुधार हो सके।
"जेएनयू में एक गाइड 24-25 छात्रों को निर्देशित कर रहा था, जिससे शोधार्थियों को उचित दिशा-निर्देश नहीं मिल पा रहा था। वहीं, प्रोफेसर के लगभग 350 पद खाली पड़े हैं।
यूजीसी के नए नियमों के अनुसार कोई गाइड अपने पद के हिसाब से कुछ निश्चित शोध छात्रों को निर्देशित कर सकेगा।