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बरेली से चैनल का चेहरा बना इनवर्टिस युनिवर्सिटी का छात्र

Tue, 06 Sep 2016 09:50 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला
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हेमंत घई - फोटो : Hemant Ghai
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जिंदगी जीने का नाम है। उन सपनों को जिन्हें आपने बुना और मेहनत के पलों से पिरोया। इस अजीबोगरीब रेस में वही जीतता है जो अपने सुनहरे भविष्य के लिए आज मेहनत करता है और उम्मीद का हाथ थामकर आगे की ओर देखता है। कुछ ऐसी ही कहानी है हेमंत घई की। 

हेमंत घई सीएनबीसी आवाज के प्राइमटाइम एंकर और एडिटर हैं। स्कॉट मार्केट हो या निवेश से जुड़े कोई भी सवाल, टीवी पर कई लोगों को हेमंत का इंतजार रहता है। लेकिन ये सफलता और नाम उन्हें चने के भाव नहीं मिले। इस पाने के लिए उन्होंने बारह साल जमकर मेहनत की है।
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फोन पर इंटरव्यू पर हमेंत ने हमें बताया कि उनकी पढ़ाई-लिखाई बरेली से ही हुई है। वो बरेली के ही रहने वाले हैं। उनकी मां पेशे से एक डॉक्टर थीं। पिता एसबीआई में बैंकर। दो उत्कृष्ठ पेशों से जुड़े अभिभावकों के होने की वजह से बचपन से ही हेमंत को एक ऐसा माहौल मिला जहां उन्हें पता था कि उन्हें भी कुछ आगे चलकर करना है।

हर आम घर की तरह हेमंत की मां चाहती थीं कि वो एक डॉक्टर बनें और पिता ये कि वो बैंकिंग सेक्टर जाएं। इन सब के बीच हमेंत की स्कूली दिन तो खत्म हो गए। लेकिन अब वक्त था कॉलेज का। वो हर किसी बच्चे की तरह बीए, बीएससी या बीकॉम कर भीड़ का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे। 

उन्हें इस बात का पता था कि उन्हें कंप्‍यूटर में मजा आता है और वो एक ऐसा ही कोर्स करना चाहते हैं जिससे उनकी कंप्यूटर स्किल्स अच्छी हों। इनवर्टिस युनिवर्सिटी ने उनके इस सपने को पूरा किया। हेमंत बताते हैं कि उन दिनों बीसीए यानी के बैचलर्स इन कंप्यूटर एजुकेशन करवाने के बहुत सारे संस्‍थान उपलब्‍ध नहीं हुआ करते थे। लेकिन शहर के ही  इनवर्टिस युनिवर्सिटी में उन्हें ये कोर्स मिल गया और उन्होंने लग्न से इसकी पढ़ाई की।

ग्रैजुएशन के बाद हेमंत का मन था की वो थोड़े मैनेजमेंट के गुर भी सीखें। उन्होंने आगे एमबीए करने की ठानी और देहरादून से इस कोर्स में भी पारंगत हो गए। अब बारी थी जीवन की असली परीक्षा की। वो परीक्षा थी अपने लिए कमाई के साधन तलाशना। 

बड़े हाथ-पैर मारने के बाद उन्हें सीएनबीसी आवाज चैनल में रीसर्च सेल में इंटर्नशिप मिल गई। लेकिन उन्होंने इस मौके को नौकरी जैसा ही समझा और सबकुछ सीखते हुए खुद को साबित किया। 

एक साल तक इस नामी संस्‍थान की इंग्लिश ब्रांच में काम करने के बाद उन्हें आभास हुआ कि वो एंकर बन सकते हैं। एंकरिंग के लिए वो ऐसी भाषा चुनना चाहते थे जिससे वो खुद भी सहज महसूस करें और सुनने वाले लोगों को भी ऐसा महसूस करा पाएं। 

हेमंत अपनेआप को बहुत भाग्यशाली मानते हैं कि उसी साल चैनल ने हिंदी ब्रांच लाने का भी निर्णय लिया। इसके बाद हेमंत ने टीम बढ़ाने और साथ ही साथ एंकर बनने के सपने को सच करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। 
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आज वो चैनल के प्राइमटाइम का चेहरा हैं और इस सब के पीछे अपनी लग्न और ढृढंता को ही जिम्मेदार बताते हैं। वे ये कहते हुए इंटरव्यू को खत्म करते हैं कि लीग से हटकर चलने की सोचने वाले गलत नहीं होता। और आखिर में करना वही चाहिए जो मन कहे। बहकावे में आकर या किसी के जोर से दुनिया कभी नहीं जीती जा सकती।
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