आईआईटी में दाखिला प्रवेश परीक्षा की जंग जीतने के बाद कैंपस में इंजीनियरिंग की पढ़ाई व नए परिवेश में खुद को ढालने के दौरान तनाव के बाद आत्महत्या के मामले कम करने के लिए आईआईटी दिल्ली पहले वर्ष के पाठ्यक्रम में बदलाव करने जा रहा है।
आईआईटी दिल्ली में पहले वर्ष के छात्रों को किताब की बजाय प्रैक्टिकल से अधिक जोड़ा जाएगा, ताकि उनका पढ़ाई का तनाव कम किया जा सके। आईआईटी दिल्ली के विभिन्न डिपार्टमेंट इसके लिए विशेष कोर्स तैयार करने रहे हैं।
आईआईटी डायरेक्टर वी रामगोपाल राव के मुताबिक, जेईई की परीक्षा पास करने के दौरान छात्रों को काफी पढ़ाई करनी होती है। कड़े मुकाबले के बाद जब वे आईआईटी कैंपस में पहले वर्ष दाखिला लेते हैं तो वे इस प्रेशर के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं होते हैं। वे इस प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के चलते तनाव में आ जाते हैं और कई छात्र आत्महत्या तक कर लेते हैं।
छात्रों की इन्हीं दिक्कतों को समझते हुए हम पहले वर्ष के छात्रों को किताबी ज्ञान की बजाय प्रैक्टिकल से अधिक जोड़ेंगे, ताकि वे इंजीनियरिंग की पढ़ाई को आसानी से समझ सकें। इसके लिए विभिन्न विभागों को पहले वर्ष को नया कोर्स तैयार करने के लिए कहा गया है।
आईआईटी प्रबंधन का मानना है कि यह नया कोर्स अगले सत्र से लागू होने की संभावना है। कोर्स में बदलाव के साथ हीउसे गवर्निंग बाडी में अप्रूव्ल के लिए भेजा जाएगा। कोर्स में बदलाव के साथ क्रेडिट सिस्टम में भी बदलाव होगा।
बता दें कि पिछले दिनों आईआईटी मुंबई में आयोजित आईआईटी काउंसिल की बैठक में एचआरडी मिनिस्टर प्रकाश जावडेकर ने भी देशभर के 31 आईआईटी प्रबंधन को छात्रों का तनाव कम करने के लिए कहा था। इसके तहत इंडेक्शन प्रोग्राम व वेलनेस सेंटर बनाना भी शामिल है।
बता दें कि आईआईटी रुड़की, आईआईटी बीएचयू और आईआईटी खड्गपुर पहले ही छात्रों का तनाव कम करने के लिए कई प्रकार के कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं।