मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि आईआईएम में काफी सरकारी हस्तक्षेप है और सरकार इसे दूर करने की दिशा में कदम उठा रही है। जावड़ेकर ने लोकसभा में बताया कि 'भारतीय प्रबंध संस्थान विधेयक 2017' को विचार के लिये पेश किया गया जिसके माध्यम से ये संस्थाएं डिग्री और पीएचडी की उपाधि प्रदान कर सकेंगे।
इसके आगे उन्होंने कहा कि अभी तक आईआईएम केवल सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और फेलोशिप प्रदान करते हैं। इसके पारित होने के बाद वे डिग्री और पीएचडी की उपाधि भी प्रदान कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि आईआईएम में काफी सरकारी हस्तक्षेप है और हमारी सरकार इसे दूर करने की दिशा में पहल कर रही है। उन्होंने ये साफ किया कि इस विधेयक में इस प्रकार के प्रावधान किये गये हैं।
आपको बता दें कि इस विधेयक में ऐसे प्रावधान हैं कि आईआईएम अब अपने छात्रों को डिग्री दे सकेंगे। आईआईएम फिलहाल छात्रों को डिग्री देने को अधिकृत नहीं हैं और प्रबंधन में पीजी डिप्लोमा और फेलो प्रोग्राम की डिग्री देते हैं। हालांकि इन पाठ्यक्रमों को एमबीए और पीएचडी के बराबर माना जाता है, लेकिन समानता वैश्विक रूप से स्वीकार्य नहीं है, खासकर फेलो प्रोग्राम के लिए।
इतना ही नहीं विधेयक में संस्थानों को पूर्ण स्वायत्ता दी गयी है, जिसमें जवाबदेही भी होगी। विधेयक में जिस ढांचे का प्रस्ताव है उसमें इन संस्थानों का प्रबंधन बोर्ड से संचालित होगा, जहां संस्थान के अध्यक्ष और निदेशक बोर्ड द्वारा चुने जाएंगे। बयान में कहा गया है कि बोर्ड में विशेषज्ञों और पूर्ववर्ती विद्यार्थियों की ज्यादा भागीदारी होगी।