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देश के सभी यूनिवर्सिटी में जल्द लागू होगा कॉमन हिंदी टीचिंग स्कीम

Sun, 23 Apr 2017 05:36 PM IST
amarujala.com- presented by: शिवेन्दु शेखर
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Source
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देशभर के यूनिवर्सिटीज और हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स को जल्द ही पारलियामेंट्री पैनल के सुझाव के बाद एक कॉमन हिंदी टीचिंग स्कीम लागू करनी पड़ सकती है।  
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वैसे संस्थान जहां हिंदी विभाग नहीं हैं, उन संस्थानों को भी विभाग शुरू करने को कहा जा सकता है।  सभी शिक्षण संस्थानों को हिंदी के लिए एक न्यूनतम स्तर सेट करने को भी कहा जा सकता है।  

इसके अलावे नॉन हिंदी स्टेट में पढ़ने वाले छात्रों को, जहां कि हिंदी में परीक्षा देने की इजाजत नहीं है, उन जगहों पर छात्रों को अपनी मातृभाषा में जवाब लिखने की इजाजत देनी होगी।  
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वैसे इस फैसले की कुछ जगहों पर निंदा भी हो सकती है।  इससे पहले ही कई कॉलेजों के स्टूडेंट ग्रुप राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के पास हिंदी को फोर्सफूली कोर्स में लागू करने को लेकर याचिका लिख रहे हैं।  

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के जवाब में इस बात का जिक्र किया गया कि, "उच्च शिक्षा में स्वायत्ता देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कुछ कानून बनाए गए हैं, जिसके तहत कुछ उच्च शिक्षण संस्थानों में, अंग्रेजी ही निर्देश का माध्यम है। " 

इसके साथ ही इसमें ये भी कहा गया कि, "इस बाबत देश के हर हिस्से में एक यूनिफॉर्म पॉलिसी फॉलो होनी चाहिए।  "एचआरडी मिनिस्ट्री को इसको लेकर एक एक्शन प्लान भी तैयार करना चाहिए और इसके लिए जरूरी कॉमन कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू करने के साथ-साथ संसद में पेश भी करना चाहिए।  

इसके अलावे एचआरडी मिनिस्ट्री को ऐसे संस्थानों पर एक नजर बनाने को कहा गया है जहां हिंदी के संस्थान नहीं हैं।  ऐसे संस्थानों को हिंदी डिपार्टमेंट तैयार करने के लिए  प्रोत्साहित करने को कहा गया है ताकि हिंदी मीडियम में पढ़ाई के लिए जरूरी मदद उनसे ली जा सके।  

इसके अलावे पार्लियामेंट्री पैनल ने ये भी कहा है कि ऐसे संस्थान जो वोलंटरिली हिंदी पढ़ाते हैं उनको मिलने वाला ग्रांट भी बहुत कम है, इसके लिए एचआरडी मिनिस्ट्री को जरूरी कदम उठाने चाहिए।  
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