शारदा ग्रुप के संस्थान हिंदुस्तान कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में 'नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग' सब्जेक्ट पर पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यशाला का आयोजन हुआ जो डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम विश्वविद्यालय द्वारा प्रायोजित था।
इस कार्यशाला के दूसरे दिन आईईटी खंदारी, आगरा से आए कंप्यूटर साइंस विभाग के प्रोफेसर डॉ.मनु प्रताप ने नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग में सॉफ्ट कंप्यूटिंग के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी ।
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डॉ.मनु ने बताया कि कंप्यूटिंग दो तरह की होती है- हार्ड कंप्यूटिंग और सॉफ्ट कंप्यूटिंग। सॉफ्ट कंप्यूटिंग का उपयोग अस्पष्टता, अनिश्चितता और आंशिक सत्य जैसे प्रोजेक्ट को बनाने में किया जाता है, जिससे अनुमानित प्रोजेक्ट्स बनाए जाते है, लेकिन हार्ड कंप्यूटिंग में अस्पष्टता, अनिश्चितता और आंशिक सत्य जैसे प्रोजेक्ट्स अनुमान के अनुसार नहीं बनाए जा सकते है।
डॉ.मनु प्रताप ने आर्टिफिशल इंटेलिजेंस को नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग से जोड़ कर नये प्रोजेक्ट बनाने का तरीका बताया। इसके साथ ही उन्होंने सर्च बेस्ड प्रोजेक्ट्स एवं रूल बेस्ड प्रोजेक्ट्स पर रिसर्च करने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
उन्होंने बताया कि मानव का दिमाग जिस तरह किसी भी वस्तुओं को पहचानने में सक्षम है, उसी तरह सॉफ्ट कंप्यूटिंग का उपयोग करके कंप्यूटर किसी भी वस्तुओं को पहचानने में सक्षम हो सकता है, इसके ऊपर प्रोजेक्ट बनाए जा सकते है। उन्होंने जैविक न्यूरॉन के बारे में विस्तार से बताया कि किस तरह सूचना हमारे मस्तिष्क में एक स्थान से दूसरे स्थान पे स्थानांतरित होती है और ये सूचना विद्युत सिग्नल के रूप में प्रवाहित होती है।
इसके साथ ही डॉ.मनु ने बताया कि कैसे कंप्यूटर को प्रशिक्षित किया जाए। उन्होंने बताया कि न्यूरल नेटवर्क फजी लॉजिक के द्वारा कंप्यूटर के मॉडल को ट्रेन्ड किया जा सकता है साथ ही उन्होंने इसमें उपयोग होने वाले सॉफ्टवेयर और आर्किटेक्चर के बारे में विस्तार से बताया।
हिंदुस्तान कॉलेज के निदेशक डॉ.राजीव कुमार उपाध्याय ने डॉ. मनु प्रताप को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर कंप्यूटर साइंस विभाग के विभागाध्यक्ष श्री मुनीष खन्ना, डॉ. हितेंद्र गर्ग, कंप्यूटर साइंस विभाग के समस्त शिक्षक, कर्मचारी एवं कार्यशाला में एकटीयू के विभिन्न कॉलेजों से प्रतिभागी शिक्षक मौजूद रहे।
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