देश से विदेश तक विभिन्न कंपनियों की पहली पसंद यूएसए के स्नातक छात्र बन रहे हैं। कंपनियों का मानना है कि विदेशी विवि से स्नातक छात्रों के पास बेहतर तकनीकी कौशल होता है। महज 51 फीसदी कंपनियां सिर्फ शीर्ष 20 भारतीय शिक्षण संस्थानों से नियुक्तियां करती हैं और इनमें से भी करीब एक चौथाई कंपनियां ऐसी हैं, जो सिर्फ शीर्ष 10 संस्थानों में किसी भी विभाग से नियुक्तियां करती हैं। ब्रिटेन के अंतरराष्ट्रीय संगठन द ब्रिटिश काउंसिल की इंडिया एंप्लॉयबिलिटी सर्वे 2014 से यह तथ्य सामने आया है।
इस सर्वे के जरिए यह पता लगाया कि अगले 3 से 5 साल के दौरान भारतीय उद्योगों को किस तरह के प्रतिभाशाली कर्मचारियों की जरूरत होगी। इस शोध में विभिन्न 200 विदेशी और भारतीय कंपनियों को शामिल किया गया। सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाली करीब 41.6 फीसदी कंपनियों ने माना कि अमेरिकी विश्वविद्यालय उनकी पहली या दूसरी पसंद होते हैं, जबकि 25.8 फीसदी कंपनियों के लिए ब्रिटेन के विश्वविद्यालय पहली पसंद बनते हैं। वहीं, 6.9 फीसदी के साथ जर्मनी तीसरे स्थान पर है।
सर्वे में पाया गया है कि भारतीय डिग्री धारक ‘सॉफ्ट’ कौशल में ज्यादा निपुण होते हैं। समूहों में काम करना और उनका बातचीत कौशल अच्छा होता है। कड़ी मेहनत करने की क्षमता भी ज्यादा है। हालांकि लगभग सभी प्रमुख कौशल में अमेरिका सबसे आगे है।
सर्वे की प्रमुख बातें
1. विदेशी स्नातकों की नियुक्ति करने वाली कंपनियों में 60 फीसदी से ज्यादा कंपनियां शीर्ष 50 वैश्विक विश्वविद्यालय के छात्रों को नौकरी देती हैं।
2. लगभग 41 फीसदी कंपनियों ने बीते दो साल के दौरान कम से कम एक विदेशी स्नातक की नियुक्ति की है।
3. कंपनियों ने माना है कि महज 14 फीसदी विदेशी स्नातकों को ही गहन प्रशिक्षण की जरूरत होती है।
निदेशक का कहना
ब्रिटिश काउंसिल इंडिया के निदेशक रॉब लाइंस ने कहा कि इस सर्वे से विश्वविद्यालय को भारतीय छात्रों को बेहतर ढंग से तैयार करने में मदद मिलेगी। उन्होंने आशा जताई कि इस सर्वे से छात्रों को भी फायदा होगा, क्योंकि वे अपनी शिक्षा को लेकर अब ज्यादा सोच-समझकर फैसले कर सकेंगे।
आईएमए इंडिया के साथ ब्रिटिश काउंसिल ने 200 कंपनियों में किया सर्वे
विदेशी विश्वविद्यालय से पास स्नातकों के पास बेहतर तकनीकी कौशल