सरकार ने IIT निदेशकों की चयन प्रक्रिया में बदलाव करने का प्रस्ताव दिया है। केंद्र सरकार ने 4 साल बाद UPA सरकार की उस पॉलिसी में बदलाव किया है जिसमें IIT निदेशकों को दूसरे कार्यकाल का मौका दिया जा सकता था।
UPA सरकार की पॉलिसी के मुताबिक निर्देशकों से उनका कार्यकाल खत्म होने से पहले ये पूछा जाता है कि क्या वो अगले पांच साल उस पद पर कार्यरत रहने के लिए इच्छुक हैं या नहीं। यदि निदेशक इच्छुक होता है तो एक निश्चित प्रक्रिया के बाद उनको दोबारा चयन किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में अन्य लोगों को मौका नहीं मिल पाता है।
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नई रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार मौजूदा चयन प्रक्रिया को बदलने पर विचार कर रही है। अब इस पद को केवल विज्ञापन के माध्यम से ही भरा जा सकेगा। इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए मानव संसाधन मंत्रालय को को इस प्रस्ताव की कॉपी भेजी गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मानव संसाधन विकास मंत्री, प्रकाश जावड़ेकर से इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने की उम्मीद है। इसे अगले IIT परिषद की बैठक में अनुमोदन के लिए रखा जा सकता है।
2013 के बाद, आवेदन के बिना पांच IIT निदेशकों को दूसरे कार्यकाल के लिए सरकार ने नियुक्त किया है।
आपको बता दें कि सरकार ने उस समय प्रस्ताव दिया है जब IIT कानपुर और IIT धनबाद के निदेशकों की नियुक्ति होने वाली है।