हाईकोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को चार महीने के भीतर राष्ट्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटेट) करवाने के आदेश दिए हैं। यह आदेश उन छात्रों के भविष्य को देखते हुआ दिया गया है, जो सीटेट की पात्रता न होने की स्थिति में शिक्षक भर्ती के लिए योग्य नहीं हैं। परीक्षा की प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर शुरू करने के लिए निर्देश दिए गए हैं।
न्यायमूर्ति जस्टिस रेखा पल्ली ने परीक्षा से जुड़े सभी पक्षों को सुनने के बाद सीटेट परीक्षा आयोजित नहीं कराए जाने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। पीठ ने कहा कि सीबीएसई और एनसीटीई के बीच संवाद की कमी के चलते शैक्षणिक योग्यता होने के बावजूद छात्र सरकारी सेवाओं में शिक्षक की नौकरी पाने से वंचित रह जाते हैं।
पीठ ने सीबीएसई के अध्यक्ष और एनसीटीई के सचिव से कहा कि वह एक सप्ताह के भीतर सीटेट कराने की प्रक्रिया शुरू करें, क्योंकि परीक्षा समय पर आयोजित करना अनिवार्य है।
गौरतलब है कि यह याचिका हिमांशू डबास और अन्य छात्रों ने मिलकर लगाई थी। उन्होंने सीबीएसई और एनसीटीई को सीटेट की परीक्षा करवाने के आदेश देने की मांग की थी।
अधिवक्ता राकेश ढींगरा के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया कि सीटेट की परीक्षा न होने की स्थिति में बीएड, एमएड और डिप्लोमा किए युवा शिक्षक बनने के लिए योग्य नहीं माने जाते। इसी वजह से वे सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने के योग्य भी नहीं रहते। याचिका में बताया गया है कि सितंबर 2016 के बाद से सीटेट का आयोजन नहीं किया गया है। साल में कम से कम एक बार इस परीक्षा का आयोजन अनिवार्य है।