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टीवी और रेडियो में करियर बनाने का सुनहरा मौका, ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग में करें पढ़ाई

Mon, 25 Dec 2017 07:48 AM IST
मार्ग डेस्क / अमर उजाला
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सूचना की क्रांति में ब्रॉडकास्ट एक अहम माध्यम साबित हुआ है। ब्रॉडकास्टिंग (प्रसारण) एक प्रकार का माध्यम है, जिसकी मदद से ऑडियो और वीडियो कंटेंट को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन (रेडियो वेव्स) के माध्यम से सैटेलाइट तक पहुंचाते हैं और वहां से वापस आकर यह कंटेट रेडियो या टेलीविजन उपकरणों में पहुंचता है। इसके लिए कई तरह के उपकरणों की जरूरत होती है, जिनमें कैमरा, माइक्रोफोन्स, स्विचर्स, एडिटिंग सिस्टम, स्टोरेज सिस्टम और स्टूडियो रूम और ट्रांसमीटर कक्षों में विशेष तकनीकी सुविधाओं की आवश्यकता होती है। इस पूरी प्रक्रिया को ब्रॉडकास्टिंग टेक्नोलॉजी कहा जाता है और इसमें काम करने वालों को ब्रॉडकास्ट इंजीनियर कहते हैं।
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क्या है ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग
करियर काउंसलर डॉ. अनुभूति सहगल कहती हैं कि ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग को इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की एक उप शाखा माना जाता है। इंजीनियरिंग की ज्यादातर शाखाएं इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, कंप्यूटर इंजीनियरिंग, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और ऑडियो इंजीनियरिंग ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग से जुड़ी हुई हैं। रेडियो फ्रीक्वेंसी (आरएफ) इंजीनियरिंग और ऑडियो इंजीनियरिंग इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग के दो प्रमुख क्षेत्र हैं, जो ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग से जुड़े हुए हैं।

ब्रॉडकास्ट इंजीनियर का काम
ब्रॉडकास्ट से जुड़े पेशेवरों को ब्रॉडकास्ट इंजीनियर या टेक्नीशियंस कहा जाता है। ब्रॉडकास्ट इंजीनियर या टेक्नीशियंस का कार्य रेडियो और टेलीविजन स्टेशनों के प्रसारण तकनीकों के सही संचालन से होता है। ब्रॉडकास्ट इंजीनियर्स एक चेन की तरह कार्य करते हैं, जिनकी कार्य पद्धति स्टूडियो से शुरू होकर ट्रांसमीटर पर खत्म होती है। ब्रॉडकास्ट टेक्नीशियंस प्रसारण सिग्नल्स का साउंड और वीडियो उपकरणों की मदद से सही तरह से संचालन बनाए रखते हैं। इसके अलावा ब्रॉडकास्ट इंजीनियर प्रसारण की अन्य गुणवत्ता को बनाए रखने का कार्य भी करते हैं।
शैक्षणिक योग्यता
ब्रॉडकास्ट इंजीनियर बनाने के लिए गणित और भौतिकी विषयों के साथ 12वीं पास होना अनिवार्य है। भारत में ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग में अलग से ग्रेजुएशन संबंधी पाठ्यक्रम नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, कंप्यूटर इंजीनियरिंग, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और ऑडियो इंजीनियरिंग संबंधी पाठ्यक्रमों को करने वाले इस क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं। इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन करने के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन में ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता प्राप्त कर सकते हैं या किसी ब्रॉडकास्ट संस्थान के साथ जुड़कर करियर की शुरुआत कर सकते हैं। हाल ही के वर्षों में कई शिक्षण संस्थानों ने पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और सर्टिफिकेट स्तर के पाठ्यक्रमों का संचालन भी शुरू किया है। इन संस्थानों में ब्रॉडकास्ट स्टेशनों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में टेकि्नकल संबंधी जानकारियों के बारे में जानकारी दी जाती है।

व्यक्तिगत गुण
ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग में करियर बनाने के लिए गणित, फिजिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स आदि क्षेत्रों में अच्छी जानकारी होनी चाहिए। उनमें ब्रॉडकास्टिंग स्टेशनों में कंप्यूटर और नेटवर्क आदि के संचालन का पता होना चाहिए। अलग-अलग स्टेशनों की आवश्यकताओं के आधार पर ब्रॉडकास्ट इंजीनियर या टेक्नोलॉजिस्ट को आधुनिक डिजिटल ब्रॉडकास्टिंग से लेकर पारंपरिक ब्रॉडकास्टिंग जैसी विभिन्न तकनीकों की जानकारी होनी चाहिए। 
कहां-कहां नौकरी
एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में हो रहे विकास के कारण ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग एक आकर्षक करियर क्षेत्र बनता जा रहा है। ब्रॉडकास्टिंग के डिजिटाइजेशन, आईपीटीवी और मोबाइल टीवी जैसे न्यू मीडिया की नई तकनीकों के कारण ब्रॉडकास्ट मीडिया इंडस्ट्री में ब्रॉडकास्ट इंजीनियर्स की मांग लगातार बढ़ रही है। इसमें टीवी व रेडियो स्टेशन, चैनल्स, पॉडकास्ट्स आदि में नौकरी कर सकते हैं।
वेतन
20-25 हजार रुपये प्रतिमाह करियर की शुरुआत में सैलरी मिलती है।  50-50हजार रुपये प्रतिमाह एक अनुभवी ब्रॉडकास्ट इंजीनियर कमाता है।
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शैक्षणिक संस्थान
सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया एंड कम्युनिकेशन, पुणे
www.simc.edu
जामिया मिलिया इस्लामिया (जेएमआई), नई‌ दिल्ली
www.jmi.ac.in
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली
www.iitd.ac.in
नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली
www.nsit.ac.in 
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