जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस में इंजीनियरिंग डिग्री प्रोग्राम में दाखिला जेईई मेन के स्कोर के आधार पर होगा। एकेडमिक काउंसिल की 18 मई को होने वाली बैठक में पहली डयूल डिग्री इंजीनियरिंग प्रोग्राम में दाखिला पॉलिसी पर फैसला होगा। खास बात है कि एनआईटी, एमआईटी को इंजीनियरिंग की सीट अलॉट करने वाला सेंट्रल सीट एलोकेशन बोर्ड ही जेएनयू में सेंट्रल काउंसलिंग से दाखिले करेगा।
जेएनयू कैंपस देश में सबसे बड़े लैंग्वेज प्रोग्राम और साइंस क्षेत्र में पढ़ाई के लिए जाना जाता है। शैक्षिक सत्र 2018-19 से स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग का नया सेंटर भी खुल जाएगा।बीटेक इंजीनियरिंग के पहले बैच में छात्रों को कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में ड्यूल डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई का मौका मिलेगा। यह पांच वर्षीय इंटीग्रेडिट कोर्स होगा, जिसमें बीटेक-एमटेक या बीटेक-एमएस कोर्स का विकल्प रहेगा। बीटेक प्रोग्राम में दाखिला लेने के बाद छात्र बीच में पढ़ाई नहीं छोड़ सकेगा।
इंजीनियरिंग के छात्र पढ़ेंगे लैंग्वेज
जेएनयू इंजीनियरिंग के छात्रों को लैंग्वेज में भी दक्ष करेगा। कैंपस में इंटरनेशनल लैंग्वेज के साथ मिलकर छात्र बीटेक इंटीग्रेेटिड कोर्स में दाखिला लेंगे। इसके अलावा, छात्रों के पास
सोशल साइंसेज, ह्यूमैनेइटीज व लैंग्वेज में वैकल्पिक पढ़ाई का मौका मिलेगा। वैकल्पिक भाषा या विषय की पढ़ाई एमटेक या एमएस कोर्स के दौरान होगी।