Plagiarism Allegations: कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के एक ब्रिटिश समाजशास्त्री, जिन्होंने साहित्यिक चोरी के सार्वजनिक आरोपों और मीडिया की जांच-पड़ताल के कारण पिछले हफ्ते इस्तीफा दे दिया था, शुक्रवार को मृत पाए गए।
मकैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के एक ब्रिटिश समाजशास्त्री, जिन्होंने साहित्यिक चोरी के सार्वजनिक आरोपों और मीडिया की जांच-पड़ताल के कारण पिछले हफ्ते इस्तीफा दे दिया था, शुक्रवार को मृत पाए गए।
शिक्षा के समाजशास्त्र के प्रोफेसर पद से इस्तीफा देते हुए, अर्डे ने एक बयान में लिखा कि "लगातार आरोपों, अटकलों और सार्वजनिक टिप्पणियों ने मुझ पर और मेरे प्रियजनों पर गहरा असर डाला है"।
उन्होंने कहा कि उनके पद छोड़ने को "मेरे बारे में फैलाई गई बातों को सच मान लेने की गलती नहीं समझी जानी चाहिए"। उन्होंने साहित्यिक चोरी के आरोपों से इनकार किया, लेकिन अपनी डॉक्टरेट पर काम करते समय कुछ गलतियां होने की बात स्वीकार की। दो दर्जन से ज्यादा शिक्षाविदों और राजनेताओं समेत उनके समर्थकों ने साहित्यिक चोरी (प्लेजरिज्म) के आरोपों को "बदनाम करने की साजिश" बताया है। उनका कहना है कि यह साजिश अर्डे और "अहम पदों" पर बैठे अन्य अश्वेत लोगों की साख को कमजोर करने के लिए रची गई है।
कैम्ब्रिज में अर्डे की नियुक्ति ने उनकी निजी कहानी को सबके सामने ला दिया। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने डिस्लेक्सिया, विकास में देरी और ऑटिज्म जैसी चुनौतियों का सामना किया। इन वजहों से वे 11 साल की उम्र तक बोल नहीं पाते थे और किशोरावस्था के आखिरी वर्षों तक पढ़ना-लिखना नहीं जानते थे।