गीतों को पाठ्यक्रम में जारी रखने का किया फैसला
इससे पहले विरोध के बाद, विश्वविद्यालय ने मलयालम विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. एमएम बशीर को इन गीतों को शामिल करने की समीक्षा के लिए नियुक्त किया था। बशीर ने इन गीतों को बाहर करने की सिफारिश की थी। उनकी रिपोर्ट बोर्ड ऑफ स्टडीज को भेजी गई, जिसने इसे अस्वीकार कर दिया।
अजित ने पीटीआई को बताया कि बशीर की रिपोर्ट की कोई कानूनी वैधता नहीं है।
उन्होंने कहा, "हमने सोमवार को रजिस्ट्रार को रिपोर्ट लौटा दी। हमने इन गीतों को पाठ्यक्रम में जारी रखने का फैसला किया है।"
गीतों का मूल्यांकन संदेश के आधार पर
उन्होंने कहा कि वेदन के रैप नंबर 'भूमि ज्ञान वाझुन्ना इदम' (वह धरती जहां मैं रहता हूं) को साहित्यिक योग्यता के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "इसका महत्व संदेश में है, न कि इसे कविता के रूप में आंकने में।"
बोर्ड ने बशीर की इस टिप्पणी को भी खारिज कर दिया कि गौरी लक्ष्मी के 'कथकली' गीत में भक्ति का अभाव है, तथा कहा कि चयन भक्ति विषय-वस्तु पर आधारित नहीं था, बल्कि उसमें निहित संदेश पर आधारित था।