आयोग भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों का चयन करने के लिए तीन चरणों - प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार - में सालाना सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करता है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट में यूपीएससी को चालू वित्त वर्ष के लिए 425.71 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इनमें से 208.99 करोड़ रुपये अध्यक्ष और सदस्यों के वेतन और भत्तों के अलावा प्रशासनिक खर्चों पर खर्च के लिए हैं।
बजट दस्तावेजों के अनुसार, "संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं, भर्ती परीक्षणों और चयनों से संबंधित व्यय" के लिए कुल 216.72 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। आयोग को 2023-24 के दौरान 426.24 करोड़ रुपये दिए गए।
भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल को 2024-25 के लिए 33.32 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह प्रावधान लोकपाल के लिए स्थापना और निर्माण से संबंधित प्रभारित व्यय के लिए है।
केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को चालू वित्त वर्ष के लिए 51.31 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। ईमानदारी की निगरानी करने वाले आयोग को 2023-24 के लिए 44.46 करोड़ रुपये दिए गए थे, जिसे पिछले वित्त वर्ष के लिए संशोधित कर 47.73 करोड़ रुपये कर दिया गया था।
प्रोबेशनरी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर का मामला सामने आने के बाद से यूपीएससी सुर्खियों में है। आयोग ने हाल ही में 2023 बैच की परिवीक्षाधीन आईएएस अधिकारी खेडकर के खिलाफ फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर योग्यता से परे सिविल सेवा परीक्षा में धोखाधड़ी से अवसर प्राप्त करने के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज किया था।