जेएनयू ने रद्द किया समझौता
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'हम राष्ट्र के साथ खड़े हैं': जेएनयू
बुधवार 14 जनवरी को जेएनयू की ओर से तुर्किये के इनोनू विश्वविद्यालय के साथ किए गए अकादमिक समझौते को निलंबित कर दिया गया। विश्वविद्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में लिखा है, "राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से जेएनयू और इनोनू विश्वविद्यालय, तुर्किये के बीच समझौता ज्ञापन को अगली सूचना तक निलंबित कर दिया गया है।"
तुर्किये के मालट्या में स्थित इनोनू विश्वविद्यालय ने क्रॉस-कल्चरल रिसर्च और छात्र सहयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत जेएनयू के साथ अकादमिक साझेदारी की थी। जेएनयू ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए यह निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय की ओर से यह भी कहा गया कि 'जेएनयू राष्ट्र के साथ खड़ा है।'
जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने रद्द किया समझौता
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जामिया मिलिया इस्लामिया राष्ट्र के साथ मजबूती से खड़ा है: जेएमआई
दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) ने भी राष्ट्रीय सुरक्षा और वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति को देखते हुए तुर्किये के साथ किए गए शैक्षणिक समझौतों को निलंबित कर दिया है। JMI प्रशासन ने कहा कि मौजूदा हालात में ऐसे संबंध बनाए रखना देशहित में नहीं है।
विश्वविद्याल की ओर जारी बयान में कहा गया, "राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से, जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली और तुर्किये गणराज्य की सरकार से संबद्ध किसी भी संस्थान के बीच किसी भी समझौता ज्ञापन (एमओयू) को तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक निलंबित कर दिया गया है। जामिया मिलिया इस्लामिया राष्ट्र के साथ मजबूती से खड़ा है।"
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्विविद्यालय, कानपुर ने रद्द किया समझौता
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कानपुर विश्वविद्यालय ने भी रद्द किया समझौता
उत्तर प्रदेश के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर ने तुर्किये की इस्तांबुल यूनिवर्सिटी के साथ पहले किए गए समझौते को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। विश्वविद्यालय के वीसी विनय पाठक ने इस्तांबुल यूनिवर्सिटी को पत्र भेजकर स्पष्ट किया कि यह निर्णय तुर्किये के पाकिस्तान के समर्थन में अपनाए गए रुख की वजह से लिया गया है।
वीसी ने कहा कि किसी ऐसे देश के शैक्षणिक संस्थान से अकादमिक संबंध बनाए रखना उचित नहीं है जो खुले तौर पर भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का विरोध करता है।
देशभर में हो रहा तुर्किये के खिलाफ विरोध
इन तीनों विश्वविद्यालयों ने तुर्किये के संस्थानों के साथ शैक्षणिक आदान-प्रदान और संयुक्त शोध कार्यक्रमों के उद्देश्य से समझौते किए थे। लेकिन मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए, प्रतिष्ठित संस्थान अब तुर्किये से दूरी बना रहे हैं। गौरतलब है कि तुर्किये द्वारा पाकिस्तान का समर्थन किए जाने के बाद से भारत में कई स्तरों पर विरोध तेज हुआ है, जिसमें व्यापारिक संगठन भी शामिल हैं।