किताब लिखते समय मैं बहुत अकेली थी: देसाई
54 वर्षीय देसाई ने कहा कि यह किताब वैश्विक अकेलेपन और एक लंबी, अनसुलझी प्रेम कहानी पर आधारित है। उन्होंने बताया कि अमेरिका में कॉलेज की पढ़ाई के दौरान उन्हें जो “कलात्मक अकेलापन” महसूस हुआ, वही इस उपन्यास की प्रेरणा बनी। उन्होंने कहा, “किताब लिखते समय मैं बहुत अकेली थी, लेकिन खुश भी थी; यह मेरे लिए एक साथी की तरह थी।”
667 पन्नों के इस उपन्यास में अमेरिका में रहने वाले दो भारतीय युवाओं सोनिया और सनी की कहानी है। बुकर पुरस्कार के निर्णायक मंडल ने इसे “विशाल और समृद्ध” उपन्यास बताया है।
साहित्यिक परिवार भी बुकर से जुड़ा
देसाई का साहित्यिक परिवार भी बुकर से जुड़ा है। उनकी मां अनिता देसाई तीन बार बुकर शॉर्टलिस्ट हो चुकी हैं। इस साल बुकर पुरस्कार के लिए नामांकित अन्य किताबों में अमेरिकी कोरियाई लेखक सुसान चोई की ‘फ्लैशलाइट’, अमेरिकी-जापानी लेखक केटी किटामुरा की ‘ऑडिशन’, ब्रिटिश-अमेरिकी लेखक बेन मार्कोविट्स की ‘द रेस्ट ऑफ अवर लाइव्स’, हंगेरियन-ब्रिटिश लेखक डेविड स्ज़ले की ‘फ्लेश’ और अंग्रेज लेखक एंड्रयू मिलर की ‘द लैंड इन विंटर’ शामिल हैं।
जीतने पर मिलेंगे 50,000 पाउंड
बुकर पुरस्कार 2025 का विजेता सोमवार रात लंदन के ओल्ड बिलिंग्सगेट में घोषित किया जाएगा। विजेता को 50,000 पाउंड मिलेगा, जबकि शॉर्टलिस्टेड सभी लेखक 2,500 पाउंड और अपनी किताब की विशेष बाउंड संस्करण प्राप्त करेंगे।