क्या था मामला?
अशोक येंडे नाम के व्यक्ति ने एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर सितंबर 2024 में BCI द्वारा जारी एक परिपत्र को चुनौती दी थी। इस परिपत्र में सभी विधि विश्वविद्यालयों और संस्थानों को छात्रों के आपराधिक इतिहास की जानकारी लेने और अन्य नियमों का पालन करने को कहा गया था।
याचिका में दावा किया गया कि यह शर्त छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है और अन्य क्षेत्रों के छात्रों से ऐसी जानकारी नहीं मांगी जाती, जिससे यह भेदभावपूर्ण हो जाता है।
BCI ने क्या निर्देश दिए थे?
परिपत्र में कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और निगरानी बढ़ाने के लिए कई प्रावधान जोड़े गए, जिनमें शामिल थे:
- कानून के छात्रों का आपराधिक रिकॉर्ड जांचने की प्रक्रिया
- एक साथ डिग्री करने की अनुमति
- नियमित शैक्षणिक कार्यक्रमों में उपस्थिति का पालन
- बायोमेट्रिक हाजिरी
- सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि BCI को छात्रों का आपराधिक इतिहास जानने का पूरा अधिकार है और इसमें कुछ भी अवैध नहीं है।
सीजे अराधे ने कहा, "बार काउंसिल ऑफ इंडिया को किसी छात्र के आपराधिक इतिहास की जांच क्यों नहीं करनी चाहिए? इसमें क्या अवैध है? किस कानून का उल्लंघन किया गया है? हमारे अनुसार, सर्कुलर में कुछ भी अवैध नहीं है।"
इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ किया कि परिपत्र में सिर्फ आपराधिक मामलों की जानकारी मांगी गई है, यह नहीं कहा गया कि यदि कोई आपराधिक रिकॉर्ड होगा तो प्रवेश रद्द कर दिया जाएगा।
याचिका खारिज, कोर्ट ने दी चेतावनी
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि BCI के इस कदम का विरोध नहीं, बल्कि स्वागत किया जाना चाहिए। यहां तक कि अदालत ने न्यायिक समय बर्बाद करने पर याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगाने की चेतावनी दी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली।
कानूनी पेशे में नैतिकता बनी रहे: BCI का तर्क
BCI ने परिपत्र में कहा कि विधि छात्रों को कानूनी पेशे की गरिमा बनाए रखने के लिए साफ आपराधिक रिकॉर्ड रखना चाहिए। इसलिए, अब कानून के सभी छात्रों को अपनी अंतिम मार्कशीट और डिग्री जारी होने से पहले किसी भी लंबित एफआईआर, आपराधिक केस, दोषसिद्धि या बरी होने की घोषणा करनी होगी।
यदि कोई छात्र जानबूझकर इस जानकारी को छिपाता है, तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी, जिसमें अंतिम मार्कशीट और डिग्री रोकने तक का प्रावधान शामिल है।