‘फेल’ शब्द हटाने के पीछे क्या सोच है?
शिक्षा विभाग का यह कदम परीक्षा के परिणाम को विद्यार्थी की पूरी क्षमता से जोड़कर देखने की सोच में बदलाव का संकेत है। मंत्री के अनुसार, किसी परीक्षा में अपेक्षित अंक हासिल नहीं कर पाने का अर्थ यह नहीं है कि विद्यार्थी में प्रतिभा या क्षमता की कमी है। इसलिए प्रमाणपत्र और अंकतालिका में इस्तेमाल होने वाली भाषा ऐसी होनी चाहिए, जिससे विद्यार्थियों का आत्मविश्वास कम न हो।
विभाग के फैसले का उद्देश्य:
- परीक्षा परिणाम को विद्यार्थी की क्षमता का अंतिम पैमाना न माना जाए।
- कम अंक पाने वाले विद्यार्थियों को नकारात्मक पहचान से बचाया जा सके।
- अंकतालिका की भाषा विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बनाए रखने में मदद करे।
- परीक्षा में सफल नहीं हो पाने को उनकी प्रतिभा की कमी न माना जाए।
क्या अभी से अंकतालिका पर नया शब्द लिखा जाएगा?
नहीं। अभी इसके लिए नियमों में संशोधन किया जाना बाकी है। शिक्षा विभाग पहले मौजूदा नियमों में बदलाव करेगा। इसके बाद बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को औपचारिक निर्देश दिए जाएंगे।
निर्देश मिलने के बाद बीएसईबी संशोधित शब्दावली को लागू करने की जिम्मेदारी निभाएगा। इसलिए फिलहाल यह बदलाव प्रस्तावित व्यवस्था के तौर पर सामने आया है।
10वीं और 12वीं दोनों की अंकतालिका पर लागू होगा बदलाव?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित बदलाव बिहार बोर्ड की कक्षा 10वीं और 12वीं, दोनों की अंकतालिकाओं से संबंधित है। हालांकि, नई व्यवस्था को लागू करने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से नियमों में संशोधन और उसके बाद बोर्ड को औपचारिक निर्देश जारी किया जाना जरूरी होगा।
यानी अंतिम रूप से यह स्पष्टता संशोधित नियमों और बीएसईबी की ओर से जारी निर्देशों के बाद आएगी।