मोदी की छवि को गलत तरीके से पेश करने का आरोप
इस डॉक्यूमेंट्री को बीबीसी के द्वारा बनाया गया था। इस पर भारत सरकार ने नाराजगी जाहिर की थी। साथ ही सरकार ने इसे विवादित बताकर प्रतिबंधित कर दिया था और बीबीसी के सोशल मीडिया अकाउंट प्रतिबंधित कर दिए थे। आरोप है कि इसमें पीएम मोदी की छवि को गलत तरीके से पेश करने के उद्धेश्य से बनाया गया है। डॉक्यूमेंट्री में नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान हुए सांप्रदायिक दंगों को लेकर दोषी बताने की चेष्टा की गई है। जबकि सुप्रीम कोर्ट से उन्हें इस मामले क्लीनचिट दी गई थी। इसे लेकर विदेश मंत्रालय ने ब्रिटिश ब्रॉडकास्टर को आपत्ति जताई थी।
हैदराबाद विश्वविद्यालय में भी हुई स्क्रीनिंग
2002 के गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी की भूमिका पर बीबीसी की इस डॉक्यूमेंट्री को शनिवार, 21 जनवरी को हैदराबाद विश्वविद्यालय में भी दिखाया गया था। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी ने इंडिया: द मोदी क्वेश्चन नामक डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को शिकायत दर्ज कराई थी। जिस के बाद अधिकारियों ने रिपोर्ट तलब की। वहीं, इस विवाद के बीच, केरल में तीन राजनीतिक समूहों ने भी घोषणा की कि वे राज्य में वृत्तचित्र की स्क्रीनिंग करेंगे।