निजी विश्वविद्यालयों के लिए नए नियम
सरकार ने ‘असम निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2025’ पेश किया, जिसमें यह प्रावधान है कि विश्वविद्यालयों में छात्रों, शिक्षकों या कर्मचारियों को धर्मांतरण से जुड़ी किसी भी गतिविधि में शामिल होने की अनुमति नहीं होगी।
इसके अलावा, यह भी प्रस्तावित किया गया है कि 1 अप्रैल, 2025 से कोई भी निजी विश्वविद्यालय नए कृषि, पशु चिकित्सा, डेयरी, मेडिकल, नर्सिंग और अन्य तकनीकी पाठ्यक्रम शुरू नहीं करेगा। विश्वविद्यालय खोलने वाले संस्थानों को असम सरकार के गृह विभाग से सुरक्षा मंजूरी भी लेनी होगी।
हर तीन साल में निरीक्षण अनिवार्य
संशोधन विधेयक के अनुसार, राज्य सरकार प्रत्येक तीन साल में विश्वविद्यालयों का निरीक्षण करेगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे तय नियमों का पालन कर रहे हैं। यदि कोई विश्वविद्यालय इन शर्तों का उल्लंघन करता है, तो उसे भंग किया जा सकता है।
श्रीमंत शंकरदेव स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में संशोधन
‘श्रीमंत शंकरदेव स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2025’ के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त करने वाले संस्थान धर्मनिरपेक्ष हों और उनकी वित्तीय स्थिति पारदर्शी हो।
आठ अन्य विश्वविद्यालयों में संशोधन
सरकार ने आठ अन्य विश्वविद्यालयों से जुड़े विधेयक भी पेश किए, जिनमें शामिल हैं:
- उत्तरी लखीमपुर विश्वविद्यालय
- कोकराझार विश्वविद्यालय
- नागांव विश्वविद्यालय
- जगन्नाथ बरूआ विश्वविद्यालय
- गुरुचरण विश्वविद्यालय
- बोंग्ईगांव विश्वविद्यालय
- सिबसागर विश्वविद्यालय
स्वाहिद कनकलता बरुआ राज्य विश्वविद्यालय
इन संशोधनों के तहत, इन विश्वविद्यालयों के पहले कुलपति की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाएगी, जबकि भविष्य में कुलाधिपति एक सलाहकार बोर्ड की सिफारिश पर कुलपति नियुक्त करेंगे।