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SC: जेईई एडवांस्ड में तीसरा अटेम्प्ट दे सकेंगे ये छात्र, सुप्रीम कोर्ट ने दी बड़ी राहत

Fri, 10 Jan 2025 02:21 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

JEE Advanced: जेईई एडवांस्ड के लिए प्रयासों की संख्या तीन से घटाकर दो करने के निर्णय के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कुछ छात्रों को राहत दी है। कोर्ट ने इस छात्रों को जेईई एडवांस्ड के लिए पंजीकरण करने की अनुमति दी है।
 
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Supreme Court On JEE Advanced - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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JEE-Advanced: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 5 नवंबर से 18 नवंबर 2024 के बीच अपने पाठ्यक्रम छोड़ने वाले याचिकाकर्ताओं को संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई)-एडवांस के लिए पंजीकरण करने की अनुमति दे दी। शीर्ष न्यायालय ने जेईई एडवांस्ड के लिए प्रयासों की संख्या तीन से घटाकर दो करने के निर्णय के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
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संयुक्त प्रवेश बोर्ड ने दो बार जारी की थी प्रेस विज्ञप्ति

न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। शीर्ष अदालत ने कहा कि जेईई-एडवांस्ड परीक्षा आयोजित करने के लिए नियुक्त संयुक्त प्रवेश बोर्ड (JAB) ने पिछले साल 5 नवंबर को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि शैक्षणिक वर्ष 2023, 2024 और 2025 में कक्षा 12 की परीक्षा देने वाले छात्र जेईई-एडवांस्ड के लिए उपस्थित होने के पात्र होंगे।

पीठ ने आगे कहा कि 18 नवंबर, 2024 को एक और प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई थी, जिसमें पात्रता को केवल दो शैक्षणिक वर्षों (2024 और 2025) तक सीमित कर दिया गया था।

Supreme Court On JEE Advanced: 5 से 18 नवंबर के बीच पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों को राहत

पीठ ने कहा, "यदि छात्र, उक्त अभ्यावेदन (5 नवंबर के) पर अमल करते हुए, इस समझ के साथ अपने पाठ्यक्रम से बाहर हो गए हैं कि वे जेईई परीक्षा में बैठने के हकदार होंगे, तो 18 नवंबर, 2024 को वादा वापस लेने से उन्हें नुकसान नहीं होने दिया जा सकता है।"

जेएबी के फैसले के गुण-दोष पर गौर किए बिना, शीर्ष अदालत ने कहा कि 5 नवंबर से 18 नवंबर, 2024 के बीच पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों को परीक्षा के लिए पंजीकरण करने की अनुमति दी जाएगी।
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याचिकाकर्ताओं का क्या कहना है?

शीर्ष अदालत दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें से एक 22 उम्मीदवारों द्वारा दायर की गई थी, जिसमें जेईई-एडवांस्ड के लिए उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध प्रयासों की संख्या तीन से घटाकर दो करने को चुनौती दी गई थी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने कहा कि 5 नवंबर 2024 की प्रेस विज्ञप्ति में किए गए वादे के कारण, उन्होंने प्रतिष्ठित आईआईटी में प्रवेश के लिए आयोजित परीक्षा में भाग लेने के लिए कॉलेज छोड़ दिए।

अधिवक्ता संजीत कुमार त्रिवेदी के माध्यम से दायर एक अन्य याचिका में कहा गया कि मामला आईआईटी में प्रवेश की प्रक्रिया से संबंधित है और जेएबी ने छात्रों के लिए पात्रता मानदंड को "मनमाने ढंग से" बदल दिया।

एक अभ्यर्थी द्वारा दायर याचिका में कहा गया है, "जेएबी ने 5 नवंबर, 2024 की अपनी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से पहले जेईई-एडवांस्ड के लिए अनुमेय प्रयासों की संख्या तीन तय की, लेकिन 18 नवंबर, 2024 की एक अन्य प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से इसे अचानक बदल दिया और इस तरह प्रयासों की संख्या घटाकर दो कर दी।"
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