2009 से 2014 तक उन्होंने राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में कार्य किया। वह 2014 से 2019 तक भारत सरकार के वित्त और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री थे। अस्वस्थ होने के कारण अरुण जेटली ने 2019 में मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होने से इनकार कर दिया था।
वे सर्वोच्च न्यायालय में वकालत भी करते थे। जनवरी 1990 में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में चयनित किया।
उन्हें 1989 में वी. पी. सिंह सरकार द्वारा अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया था। अरुण जेटली बोफोर्स घोटाले की जांच में भी शामिल थे।
09 अगस्त, 2019 को, उन्हें सांस फूलने की शिकायत के बाद नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती किया गया था।
17 अगस्त को बताया गया कि जेटली लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर हैं। 23 अगस्त को यह सूचना मिली कि उनकी तबीयत अधिक खराब हो गई है और 24 अगस्त 2019 को अरुण जेटली का 66 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
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