ए पी गोयल शिमला विश्वविद्यालय में छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण दिन था। जहां विश्वविद्यालय द्वारा पेशेवर और तकनीकी शिक्षा के माध्यम से रोजगार और उद्यम शीलता का अवसर प्रदान करना पर आयोजित एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर देश एवं दुनिया के विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
मौके पर ए पी गोयल शिमला विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉक्टर तेज प्रताप ने कहा कि भारत के विकास में युवाओं का अहम योगदान है तथा तकनीकी एवं व्यवसायिकशिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखना देश की आवश्यकता है।
यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन छात्रों के विकास एवं उद्यमशीलता का गुण सिखने के लिए एक महत्वपूर्ण मौका प्रदान कर रहा। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो डॉ. अश्विनी कुमार ने कहा कि हमें रोजगार प्राप्त करने के लिए शिक्षा को तकनीकी से जोड़ना चाहिए।
ए पी गोयल शिमला यूनिवर्सिटी के निदेशक अजीत ने अफ्रीका व भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों का हवाला देते हुए कहा कि तकनीकी शिक्षा अभी पूर्णता विकसित नहीं हुई है।
कौशल विकास भी सही तरह से नहीं हो पा रहा है उन्होंने कहा कि हमारे समक्ष तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने की चुनौती है। इसविषय पर बात करते हुए हिमाचल प्रदेश केशिक्षा सचिव अरुण शर्मा ने कहाकि प्रदेश की मात्र 3% जनसंख्या प्रदेश में रोजगार प्राप्त कर रही है।
अतः प्रदेश सरकार शिक्षा प्रणाली को अधिक व्यवहारिक बनाने पर जोर दे रही है। समारोह का आरंभ दीप प्रज्वलित करके किया गया। इसके अलावा समारोह के तकनीकी सेशन में सुजॉय नायर अध्यक्ष आई नेचर ने कहा कि भारत में सबसे बड़ी समस्या है कि उपयुक्त नौकरी के लिए सही व्यक्ति उपलब्ध नहीं है तथा हम उन नौकरियों पर ध्यान दे रहे हैं जिन्हें तकनीक समाप्त कर रही है।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे त्रिभुवन विश्वविद्यालय नेपाल के कुलपति तीर्थराज ने कहा कि हमें कौशल विकास को बढ़ाना है उन्होंने कहा कि केवल शिक्षा प्राप्त करने मात्र से रोजगार का सृजन नहीं होता है जब तक कौशल विकास ना हो । अमर उजाला के अध्यक्ष राजीव ने समारोह के समापन पर कहा कि जिस देश की शिक्षा प्रणाली स्वस्थ नहीं है उस देश का स्वयं ही विनाश हो जाता है वर्तमान परिदृश्य से छात्रों को ज्यादा जिम्मेदारी का निर्वहन करना अनिवार्य हो गया है।
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